
सेहत से जुड़े सवालों पर AI चैटबॉट कर रहे मरीजों को गुमराह! अप्रमाणित इलाज वाले निजी क्लीनिकों के लिंक देने का खुलासा

नई दिल्ली/ओटावा: स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का समाधान तलाशने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट पर भरोसा करना मरीजों के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है। एक नए शोध में सामने आया है कि प्रमुख AI चैटबॉट कई बार प्रमाणित चिकित्सा जानकारी देने के बजाय ऐसे निजी क्लीनिकों के लिंक सुझा रहे हैं, जिनके इलाज की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है। कनाडा की साइमन फ्रेजर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अध्ययन के बाद इसे लेकर चेतावनी दी है।
ChatGPT, Gemini और Claude पर उठे सवाल
शोधकर्ताओं के मुताबिक, ChatGPT, Gemini और Claude समेत प्रमुख AI चैटबॉट मरीजों को स्टेम सेल थेरेपी से जुड़े व्यावसायिक क्लीनिकों की ओर निर्देशित कर रहे हैं। इन क्लीनिकों में अल्जाइमर और ऑटिज्म जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज को लेकर अप्रमाणित दावे किए जा रहे हैं। शोध में पाया गया कि ऐसे दावे मरीजों को भ्रमित कर सकते हैं और उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।
5025 लिंक्स में 23.4 प्रतिशत व्यावसायिक क्लीनिकों के
अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने छह प्रमुख AI चैटबॉट से अल्जाइमर, ऑटिज्म और सेरेब्रल पाल्सी जैसी बीमारियों से संबंधित सवाल पूछे। इन बीमारियों को अक्सर स्टेम सेल थेरेपी से जोड़कर देखा जाता है।
शोधकर्ताओं ने कुल 540 सवाल पूछे, जिनके जवाब में चैटबॉट्स ने 5,025 लिंक उपलब्ध कराए। विश्लेषण में सामने आया कि इनमें से करीब 23.4 प्रतिशत लिंक मुनाफा कमाने वाले निजी क्लीनिकों के थे। इन क्लीनिकों पर अप्रमाणित उपचार और भ्रामक दावों के जरिए मरीजों को आकर्षित करने की आशंका जताई गई है।
छह प्रमुख AI मॉडल पर किया गया अध्ययन
इस शोध में ChatGPT, Claude, Gemini, Llama, DeepSeek और Grok समेत छह प्रमुख AI मॉडल का विश्लेषण किया गया। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि स्वास्थ्य संबंधी सवालों पर ये चैटबॉट किस तरह की जानकारी और उपचार के विकल्प सुझाते हैं।
मरीजों की सेहत के लिए हो सकता है जोखिम
शोधकर्ताओं ने आगाह किया है कि AI चैटबॉट से मिली हर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को प्रमाणित मेडिकल सलाह नहीं माना जाना चाहिए। खासकर स्टेम सेल थेरेपी जैसे उपचारों के मामले में अप्रमाणित दावों पर भरोसा करना मरीजों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। यह अध्ययन BMJ Connections Digital Health and AI में प्रकाशित हुआ है।




