
थैलेसीमिया से जंग हार गई मीसा, लेकिन दूसरों की जिंदगी रोशन करने की छोड़ गई मिसाल

धनबाद: जिंदगी की जंग हारने के बाद भी नौ वर्षीया मीसा किसी की जिंदगी में रोशनी लाने की उम्मीद छोड़ गई। थैलेसीमिया से पीड़ित मीसा के निधन के बाद उसकी मां ने मानवता और संवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हुए बेटी की कॉर्निया दान करने का फैसला लिया। इस पहल से दो जरूरतमंद लोगों को नई रोशनी मिलने की उम्मीद जगी है।
इलाज के लिए एसएनएमएमसीएच पहुंचने से पहले तोड़ा दम
मीसा मूल रूप से हजारीबाग की रहने वाली थी। वह लंबे समय से थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही थी। इलाज और देखभाल की सुविधा के लिए वह गिरिडीह जिले के डुमरी स्थित अपने ननिहाल में रह रही थी। पिछले कुछ दिनों से उसकी तबीयत लगातार खराब चल रही थी। बुधवार को परिजन उसे इलाज के लिए धनबाद स्थित शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसएनएमएमसीएच) लेकर पहुंचे, लेकिन अस्पताल पहुंचने से कुछ देर पहले ही उसने दम तोड़ दिया।
बेटी के जाने के बाद भी मां ने दिखाई इंसानियत
मीसा के निधन के बाद समाजसेवी अंकित राजगढ़िया ने उसकी मां सविता देवी को कॉर्निया दान के लिए प्रेरित किया। बेटी को खोने के असहनीय दुख के बीच मां ने बड़ा दिल दिखाते हुए उसकी कॉर्निया दान करने की सहमति दे दी। इसके बाद बुधवार को एसएनएमएमसीएच के नेत्र विभाग में कॉर्निया दान की आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई।
14 दिनों तक सुरक्षित रखी जाएगी कॉर्निया
एसएनएमएमसीएच के नेत्र विभागाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि मीसा की कॉर्निया को अगले 14 दिनों तक नेत्र विभाग में सुरक्षित रखा जाएगा। इस दौरान जरूरतमंद मरीज या उनके परिजन कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए विभाग से संपर्क कर सकते हैं।
मीसा भले ही अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसके परिवार के इस फैसले ने अंगदान और नेत्रदान के महत्व का संदेश दिया है। एक मां ने अपने दुख को मानवता की सेवा से जोड़कर दूसरों के जीवन में उम्मीद की नई किरण जगाई है।




