
ऑनलाइन खरीदारी में डार्क पैटर्न का जाल, भारतीय उपभोक्ताओं को हर साल 28 हजार करोड़ रुपये तक का नुकसान
दिल्ली, एजेंसी। ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान सस्ते सामान और आकर्षक ऑफर का लालच भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर भारी पड़ रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में उपभोक्ताओं को डार्क पैटर्न के कारण हर साल करीब 25,000 से 28,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल होने वाले ये तरीके ग्राहकों को उनकी जरूरत से ज्यादा खर्च करने के लिए प्रेरित करते हैं।
क्या है डार्क पैटर्न?
डार्क पैटर्न वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर इस्तेमाल किए जाने वाले ऐसे डिजाइन और तकनीक हैं, जिनके जरिए उपभोक्ताओं को किसी खास तरीके से खरीदारी करने के लिए प्रभावित किया जाता है। इनका मकसद ग्राहकों की वास्तविक जरूरत के बजाय कंपनियों की बिक्री और मुनाफा बढ़ाना होता है। कई बार उपभोक्ताओं को अतिरिक्त शुल्क, अनचाहे विकल्प और भ्रामक ऑफर के जरिए अधिक भुगतान करने के लिए प्रेरित किया जाता है।
88 प्रतिशत ऑनलाइन खरीदार हो रहे प्रभावित
‘डार्क पैटर्न इन इंडिया’ रिपोर्ट के अनुसार, देश के करीब 30.4 करोड़ ऑनलाइन खरीदारों में से 88 प्रतिशत किसी न किसी तरह के डार्क पैटर्न से प्रभावित हो रहे हैं। इसके कारण उपभोक्ता अनजाने में अतिरिक्त खर्च कर बैठते हैं। आकर्षक छूट, सीमित समय के ऑफर और खरीदारी के दौरान जोड़े जाने वाले अतिरिक्त शुल्क इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर 1915
डार्क पैटर्न पर रोक लगाने के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनका उद्देश्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भ्रामक डिजाइन और अनुचित कारोबारी तरीकों पर अंकुश लगाना है। यदि किसी उपभोक्ता को लगता है कि उससे गलत तरीके से अतिरिक्त शुल्क वसूला गया है या खरीदारी के दौरान उसके साथ अनुचित व्यवहार हुआ है, तो वह राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 पर शिकायत दर्ज करा सकता है।




