
अब कॉल ड्रॉप की समस्या से मिलेगी राहत! 2027 से बदलेंगे टेलीकॉम नेटवर्क के नियम, आईपी तकनीक अपनाएंगी कंपनियां

मोबाइल पर बार-बार कॉल कटने और कॉल कनेक्ट होने में देरी की समस्या से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। दूरसंचार नियामक भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने टेलीकॉम कंपनियों के बीच कॉल और नेटवर्क कनेक्शन से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किया है। इसके तहत सभी टेलीकॉम कंपनियों को चरणबद्ध तरीके से पुरानी तकनीक छोड़कर आधुनिक आईपी आधारित नेटवर्क व्यवस्था अपनानी होगी। नई व्यवस्था लागू होने से कॉल कनेक्टिविटी बेहतर होने और कॉल ड्रॉप की समस्या कम होने की उम्मीद है।
1 जनवरी 2027 से लागू होंगे नए नियम
ट्राई की ओर से जारी नए प्रावधान 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे। इसके लिए नियामक ने ‘दूरसंचार इंटरकनेक्शन विनियम-2026’ में संशोधन किया है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य टेलीकॉम कंपनियों के बीच पुराने नेटवर्क ढांचे को आधुनिक तकनीक से बदलना और कॉल कनेक्टिविटी को अधिक प्रभावी बनाना है।
तीन साल में पुरानी तकनीक होगी खत्म
नए नियमों के तहत वर्तमान में इस्तेमाल हो रही ई-टीडीएम आधारित पुरानी इंटरकनेक्शन व्यवस्था को अगले तीन वर्षों के भीतर पूरी तरह आईपी आधारित इंटरकनेक्शन प्रणाली में बदलना होगा। इसके लिए टेलीकॉम कंपनियों को चरणबद्ध तरीके से अपने नेटवर्क का आधुनिकीकरण करना होगा।
क्या है ई-टीडीएम तकनीक?
ई-टीडीएम टेलीकॉम कंपनियों के बीच फोन कॉल पहुंचाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली पुरानी तकनीक है। यह एक डिजिटल टेलीकॉम लाइन होती है, जिसकी कुल क्षमता 2.048 मेगाबिट प्रति सेकंड होती है। अब इसकी जगह आधुनिक आईपी आधारित तकनीक अपनाई जाएगी, जिससे नेटवर्क के बीच बेहतर तालमेल और कॉल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
उपभोक्ताओं को क्या होगा फायदा?
आईपी आधारित इंटरकनेक्शन व्यवस्था लागू होने से टेलीकॉम नेटवर्क के बीच कॉल का आदान-प्रदान अधिक आधुनिक और प्रभावी हो सकेगा। इससे कॉल कनेक्ट होने में लगने वाला समय कम होने और बार-बार कॉल कटने की समस्या में सुधार आने की उम्मीद है। हालांकि, इसका वास्तविक असर नई व्यवस्था लागू होने और कंपनियों के नेटवर्क अपग्रेड करने के बाद ही स्पष्ट होगा।




