
Ranchi University का बड़ा फैसला, 2009 नियम के तहत PhD कर रहे शोधार्थियों को मिलेगा रजिस्ट्रेशन का मौका
15 सितंबर को जारी अधिसूचना में यूनिवर्सिटी ने 2009 PhD Regulations के तहत आगे बढ़ चुके योग्य शोधार्थियों के मामलों पर विचार करने की बात कही। विभागाध्यक्षों द्वारा सत्यापित सूची के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी होगी।

Ranchi: रांची यूनिवर्सिटी ने PhD शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी की है। 15 सितंबर 2026 को जारी नोटिफिकेशन में उन शोधार्थियों के PhD रजिस्ट्रेशन से जुड़े मामलों को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई है, जिनका शोध कार्य Ph.D. Regulations, 2009 के तहत पहले से आगे बढ़ चुका था।
यूनिवर्सिटी ने कहा है कि संबंधित विभागाध्यक्षों की ओर से विधिवत सूचीबद्ध किए गए पात्र शोधार्थियों के मामलों पर 2009 के PhD Regulations के तहत रजिस्ट्रेशन के लिए विचार किया जाएगा।
2009 से 2022 के नियमों में बदलाव के बीच राहत
यह अधिसूचना Ph.D. Regulations, 2009 से Ph.D. Regulations, 2022 में हुए बदलाव और नए Standard Operating Procedure यानी SOP के संक्रमण से जुड़े मामलों को लेकर है।
इसमें उन शोधार्थियों को ध्यान में रखा गया है, जिन्होंने पुराने नियमों के तहत अपनी PhD प्रक्रिया शुरू कर दी थी और उनका अकादमिक कार्य आगे बढ़ चुका था।
किन शोधार्थियों के मामलों पर होगा विचार?

यूनिवर्सिटी की ओर से जारी सूचना के अनुसार, ऐसे पात्र शोधार्थियों के मामलों पर विचार किया जा सकता है, जिनके संबंध में पुराने नियमों के तहत निम्न प्रक्रियाएं पूरी या शुरू हो चुकी थीं:
- Course Work पूरा किया जा चुका हो या प्रक्रिया शुरू हो गई हो।
- Internal DRC/DRC की प्रक्रिया पूरी या शुरू हो चुकी हो।
- Research Topic Finalization हो चुका हो या निर्धारित प्रक्रिया में आगे बढ़ चुका हो।
- शोधार्थी का नाम संबंधित Head of Department की ओर से विधिवत सूची में शामिल किया गया हो।
विभागाध्यक्ष करेंगे आवश्यकताओं का सत्यापन
रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में संबंधित विभागाध्यक्षों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। पात्र शोधार्थियों से जुड़ी निर्धारित शर्तों और आवश्यक दस्तावेजों का विभाग स्तर पर सत्यापन किया जाएगा।
इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मामले को सक्षम प्राधिकारी की अंतिम स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
पुराने और नए नियमों के बीच संक्रमण को लेकर स्थिति साफ
PhD Regulations में बदलाव के कारण जिन शोधार्थियों का अकादमिक काम पुराने नियमों के तहत पहले से चल रहा था, उनके लिए यह अधिसूचना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यूनिवर्सिटी के इस कदम से पात्र शोधार्थियों को अपनी PhD प्रक्रिया की निरंतरता को लेकर स्पष्टता मिलने की उम्मीद है। साथ ही, 2009 और 2022 के PhD नियमों के बीच बदलाव के दौरान सामने आने वाले मामलों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत निपटाने का रास्ता भी साफ होता है।
रांची यूनिवर्सिटी ने अकादमिक निरंतरता, शोध कार्य को आगे बढ़ाने और शोधार्थियों के अकादमिक हितों को ध्यान में रखते हुए प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की बात कही है।




