
रांची के जैन मंदिरों में क्षमावाणी का संदेश, कहा- क्षमा कमजोरी नहीं आत्मबल की पहचान
पर्युषण महापर्व के अंतिम दिन दिगंबर और श्वेतांबर समाज ने किए धार्मिक अनुष्ठान, सामूहिक प्रतिक्रमण में आत्मशुद्धि का लिया संकल्प

रांची: पर्युषण महापर्व के अंतिम दिन मंगलवार को रांची के अलग-अलग जैन मंदिरों में क्षमा, आत्मशुद्धि और संयम का संदेश दिया गया. दिगंबर और श्वेतांबर जैन समाज की ओर से पूजा-पाठ, प्रवचन और सामूहिक सांवत्सरिक प्रतिक्रमण का आयोजन किया गया. इस दौरान श्रद्धालुओं ने अपने जाने-अनजाने हुए अपराधों के लिए क्षमा मांगने और दूसरों को क्षमा करने का संकल्प लिया.
दिगंबर जैन भवन में क्षमा को बताया आत्मबल
हरमू रोड स्थित दिगंबर जैन भवन में श्री साधुमार्गी जैन संघ की ओर से धार्मिक कार्यक्रम हुआ. स्वाध्यायी पुष्पा ओसवाल ने क्षमा के महत्व को समझाते हुए कहा कि भगवान महावीर ने क्षमा को वीरों का आभूषण बताया है. उन्होंने कहा कि किसी को माफ करना आसान नहीं होता, इसके लिए क्रोध, अहंकार और बदले की भावना पर नियंत्रण जरूरी है.
कार्यक्रम के दौरान अंतकृद्दशांग सूत्र के वाचन का समापन भी हुआ. वहीं, चंदनबाला के जीवन से जुड़ा प्रेरणादायक प्रसंग सुनाया गया. शाम के समय समाज के लोगों ने सामूहिक सांवत्सरिक प्रतिक्रमण में हिस्सा लिया.
जैन भवन में 16 सितंबर को सुबह 10 बजे स्वाध्यायी के विदाई समारोह के साथ क्षमावाणी कार्यक्रम आयोजित होगा. इस अवसर पर तेरापंथ युवक परिषद की ओर से रक्तदान शिविर भी लगाया जाएगा.
श्वेतांबर जैन मंदिर में क्षमापना पर हुआ प्रवचन
डोरंडा स्थित श्वेतांबर जैन मंदिर में सुबह स्नात्र पूजा के साथ धार्मिक कार्यक्रम की शुरुआत हुई. मुंबई से आए साधर्मी धैर्य पीयूष भाई और तीर्थ धर्मवीर शाह ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया. प्रवचन में जैन धर्म में क्षमापना के महत्व और भगवान महावीर के सिद्धांतों पर चर्चा की गई.
वक्ताओं ने कहा कि क्षमा केवल शब्दों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि मन, वचन और कर्म से भी क्षमापना का भाव रखना जरूरी है. पर्युषण के दौरान श्रद्धालुओं ने उपवास और धार्मिक अनुष्ठानों के जरिए आत्मशुद्धि और कर्मों की निर्जरा का प्रयास किया.
शाम 3:30 बजे मंदिर परिसर में सामूहिक सांवत्सरिक प्रतिक्रमण हुआ. वहीं, 20 सितंबर को सकल जैन श्वेतांबर समाज की ओर से क्षमापना कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. इस दिन सुबह 8:30 बजे मंदिर से शोभायात्रा निकाली जाएगी.
कार्यक्रम में दोनों जैन समाजों के बड़ी संख्या में श्रद्धालु और समाज के पदाधिकारी मौजूद रहे.



