बंद खदानों की जमीन पर बनेंगे रोजगार और विकास के नए रास्ते, नवीकरणीय ऊर्जा से लेकर पर्यटन और कृषि तक की संभावनाएं तलाशी जाएंगी

रांची: झारखंड में अब बंद होने वाली कोयला खदानों को यूं ही छोड़ने के बजाय उनका दोबारा इस्तेमाल करने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने बंद खदानों के वैज्ञानिक पुनर्वास और उनके बेहतर उपयोग की दिशा में गिरिडीह ओपन कास्ट प्रोजेक्ट और रामगढ़ की करमा OCP को पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना है। इसको लेकर रांची में एक अहम बैठक हुई, जिसमें दोनों खदानों को पायलट परियोजना के तौर पर विकसित करने के लिए केंद्र सरकार को अनुशंसा भेजने पर सहमति बनी।
यह पूरी पहल भारत सरकार के कोयला मंत्रालय और जर्मनी की संस्था GIZ के सहयोग से चल रही Technical Cooperation on To-be-Closed Coal Mines यानी TCCM परियोजना का हिस्सा है। बैठक में खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव अरवा राजकमल समेत राज्य सरकार के अधिकारी, GIZ के प्रतिनिधि, कोल कंट्रोलर ऑर्गनाइजेशन, CCL और CMPDI के अधिकारी शामिल हुए।
बंद खदानों का कैसे होगा इस्तेमाल?
योजना के तहत इन खदानों के लिए एक विस्तृत Final Mine Closure and Repurposing Plan तैयार किया जाएगा। इसमें यह तय किया जाएगा कि खदान बंद होने के बाद वहां की जमीन, पानी, पर्यावरण और मौजूद आधारभूत ढांचे का किस तरह बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।
सरकार की कोशिश है कि खदान बंद होने के बाद वह इलाका वीरान न हो, बल्कि वहां रोजगार, कारोबार और स्थानीय विकास के नए अवसर पैदा हों। इसके लिए नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के साथ-साथ पर्यटन, कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन और कौशल विकास केंद्र जैसी गतिविधियों की संभावनाएं भी देखी जाएंगी।
करमा OCP के 8 गांवों पर विशेष फोकस

करमा OCP के आसपास करीब 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले आठ गांवों को इस योजना में शामिल किया गया है। इनमें सुगिया, मरार, बोंगाबार, करमा, कैथा, कंडेर, लोढ़मा और पैंकी शामिल हैं। इन गांवों में लोगों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति, आजीविका के साधन और कमजोर वर्गों की जरूरतों का आकलन किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर बेहतर समन्वय के लिए Mine Closure Advisory Committee का भी गठन किया गया है।
बनेगी विस्तृत DPR
परियोजना के अगले चरण में विस्तृत DPR यानी Detailed Project Report तैयार की जाएगी। इसमें पर्यावरण की बहाली, जमीन के भविष्य के उपयोग, जल प्रबंधन, माइन वॉइड मैनेजमेंट और मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर के दोबारा इस्तेमाल जैसे मुद्दों को शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही ऐसे स्थानों की पहचान भी होगी, जहां सोलर या दूसरी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जा सकती हैं।
देश के लिए मॉडल बन सकता है झारखंड
राज्य सरकार का मानना है कि खनिज संसाधन खत्म होने के बाद भी खनन क्षेत्र को आर्थिक रूप से सक्रिय रखना जरूरी है। अगर गिरिडीह और करमा OCP का यह मॉडल सफल रहता है, तो इसे झारखंड के दूसरे इलाकों के साथ-साथ देश की अन्य बंद होने वाली कोयला खदानों में भी लागू किया जा सकता है।
TCCM परियोजना मार्च 2030 तक चलेगी और इसके दौरान मिलने वाले अनुभवों के आधार पर भविष्य की बंद खदानों के लिए बेहतर पुनर्वास मॉडल तैयार किया जाएगा। यानी, झारखंड में अब बंद कोयला खदानों की कहानी सिर्फ खनन खत्म होने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इन्हीं इलाकों से रोजगार और विकास की नई शुरुआत करने की कोशिश होगी।

