रांची RIO में बढ़ा नेत्रदान का भरोसा, 2024 से अब तक 299 लोगों ने किया आंखों का दान

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इस दौरान 188 कॉर्नियल ट्रांसप्लांट किए गए; नेत्रदान पखवाड़े में रोजाना मिल रहे 30 से ज्यादा डोनेशन के संकल्प

रांची: किसी की दुनिया अंधेरे में न रहे, इसके लिए रांची के क्षेत्रीय नेत्र विज्ञान संस्थान (RIO) में नेत्रदान को लेकर लोगों की जागरूकता लगातार बढ़ रही है। संस्थान में वर्ष 2024 से अब तक 299 नेत्रदान दर्ज किए गए हैं। वहीं, इनसे प्राप्त कॉर्निया की मदद से अब तक 188 कॉर्नियल ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं।

RIO के प्रमुख डॉ. सुनील कुमार के मुताबिक, नेत्रदान के आंकड़ों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। वर्ष 2024 में संस्थान को 87 नेत्रदान मिले थे। यह संख्या 2025 में बढ़कर 142 हो गई। वहीं, इस साल 31 अगस्त तक 70 नेत्रदान दर्ज किए जा चुके हैं।

कॉर्निया ट्रांसप्लांट के आंकड़े भी बढ़े

नेत्रदान के साथ ही कॉर्नियल ट्रांसप्लांट के मामलों में भी बढ़ोतरी हुई है। डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि वर्ष 2024 में 55 कॉर्नियल ट्रांसप्लांट, 2025 में 88 ट्रांसप्लांट किए गए। वहीं, इस साल अगस्त तक 45 मरीजों का कॉर्नियल ट्रांसप्लांट किया जा चुका है।

नेत्रदान से प्राप्त कॉर्निया का इस्तेमाल कॉर्नियल अंधता से जूझ रहे मरीजों की आंखों की रोशनी लौटाने के लिए किया जाता है।

जागरूकता अभियान का दिख रहा असर

RIO के अधिकारियों का कहना है कि नेत्रदान के प्रति लोगों की सोच में बदलाव लाने में लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों की बड़ी भूमिका रही है। स्वास्थ्य विभाग और RIO की ओर से लोगों को नेत्रदान के महत्व के बारे में जानकारी दी जा रही है।

इसी कड़ी में 25 अगस्त से 8 सितंबर तक 41वां नेत्रदान पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इसके तहत RIO परिसर में कई जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। लोगों को मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने का संकल्प लेने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।

रोजाना मिल रहे 30 से ज्यादा डोनेशन के संकल्प

डॉ. सुनील कुमार के अनुसार, नेत्रदान पखवाड़े की शुरुआत के बाद से RIO को हर दिन कम से कम 30 नेत्रदान प्रतिज्ञाएं मिल रही हैं। यह आंकड़ा बताता है कि लोग अब नेत्रदान के जरिए किसी जरूरतमंद की जिंदगी में रोशनी लाने को लेकर पहले से ज्यादा गंभीर हैं।

परिवारों की सहमति से मिल रहा कॉर्निया

राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन यानी SOTTO की राज्य नोडल अधिकारी डॉ. मनीषा कुजूर ने बताया कि झारखंड में अंग और ऊतक दान के लिए प्रतिज्ञाओं की संख्या अभी भी अपेक्षाकृत कम है। इसे बढ़ाने के लिए रिम्स में शोक परामर्शदाता उन मरीजों के परिवारों से बातचीत करते हैं, जिन्हें मस्तिष्क या हृदय संबंधी कारणों से मृत घोषित किया जाता है।

परिजनों को कॉर्निया दान के महत्व के बारे में समझाया जाता है। इसके बाद कई परिवार आगे आकर नेत्रदान के लिए सहमति दे रहे हैं।

रिम्स नेत्र बैंक में पर्याप्त कॉर्निया उपलब्ध

डॉ. मनीषा कुजूर के मुताबिक, रिम्स नेत्र बैंक में फिलहाल कॉर्निया का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इससे कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की जरूरत वाले मरीजों को इलाज उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।

नेत्रदान को लेकर बढ़ती जागरूकता न सिर्फ आंकड़ों में दिखाई दे रही है, बल्कि इससे उन मरीजों के लिए उम्मीद भी बढ़ी है, जो कॉर्नियल अंधता के कारण अपनी दृष्टि खो चुके हैं।

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