PFRDA ने निवेश योजनाओं के वर्गीकरण और नामकरण का नया फ्रेमवर्क किया लागू; कुछ स्कीम्स के नाम बदलेंगे, ज्यादा स्कीम होने पर होगा विलय या रीस्ट्रक्चर

नई दिल्ली: नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS में निवेश करने वालों के लिए अहम बदलाव किया गया है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी PFRDA ने NPS की निवेश योजनाओं को लेकर नया फ्रेमवर्क जारी किया है। इसका उद्देश्य अलग-अलग स्कीम्स को एक समान तरीके से पेश करना है, ताकि निवेशक किसी योजना में पैसा लगाने से पहले उसके रिस्क, निवेश पैटर्न और संभावित रिटर्न को आसानी से समझ और तुलना कर सकें।
नए नियमों के तहत कुछ मौजूदा स्कीम्स के नाम बदले जा सकते हैं। वहीं, अगर किसी एक कैटेगरी में तय सीमा से ज्यादा स्कीम्स चल रही हैं, तो उनका मर्जर या रीस्ट्रक्चरिंग भी किया जा सकता है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि ये बदलाव रिटेल यानी आम नागरिकों के NPS खातों के लिए हैं। सरकारी कर्मचारियों के NPS खातों पर ये नियम लागू नहीं होंगे।
पांच प्रमुख हिस्सों में बांटी गईं NPS स्कीम्स
नए फ्रेमवर्क के तहत NPS की निवेश योजनाओं को पांच प्रमुख हिस्सों में वर्गीकृत किया गया है।
1. लाइफसाइकिल बेस्ड स्कीम्स
इस कैटेगरी में उम्र के हिसाब से निवेश का अनुपात बदलता रहेगा। इसमें LC-Aggressive, LC-50 Moderate और LC-25 Low जैसे विकल्प शामिल हैं। जैसे-जैसे निवेशक की उम्र बढ़ती है, इक्विटी और बॉन्ड में निवेश का अनुपात भी बदलता है।
2. एक्टिव चॉइस
इसमें निवेशक अपनी पसंद और जोखिम क्षमता के अनुसार इक्विटी, कॉर्पोरेट बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश का अनुपात तय कर सकते हैं।
3. NPS संचय
यह योजना खासतौर पर अनौपचारिक क्षेत्र के लोगों के लिए तैयार की गई है और इसका ढांचा सरकारी क्षेत्र के NPS मॉडल पर आधारित है।
4. 4A स्कीम्स
इस कैटेगरी में विशेष उद्देश्य वाली योजनाओं को रखा जाएगा। इसमें NPS वात्सल्य, NPS स्वास्थ्य और NPS MSME जैसी स्कीम्स शामिल होंगी।
5. मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क यानी MSF
इस कैटेगरी में स्कीम्स को उनके इक्विटी एक्सपोजर और जोखिम के आधार पर व्यवस्थित किया जाएगा। नए नियमों में सबसे बड़ा बदलाव इसी फ्रेमवर्क से जुड़ा है।
MSF में इक्विटी के आधार पर तय होगी कैटेगरी
MSF के तहत निवेश योजनाओं को इक्विटी में निवेश की सीमा के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी में रखा गया है। इसमें जोखिम के स्तर के हिसाब से स्कीम्स को वर्गीकृत किया जाएगा।
- Category A: 80% से 100% इक्विटी — बहुत ज्यादा जोखिम
- Category B: 60% से 80% इक्विटी — हाई ग्रोथ
- Category C: 35% से 60% इक्विटी — बैलेंस्ड ग्रोथ
- Category D: 10% से 35% इक्विटी — कंजर्वेटिव
- Category E: 0% से 10% इक्विटी — डेट आधारित निवेश
इस बदलाव से निवेशकों के लिए अलग-अलग योजनाओं के जोखिम स्तर को समझना पहले की तुलना में आसान हो सकता है।
स्कीम के नाम रखने का भी तय हुआ नया फॉर्मेट
PFRDA ने NPS स्कीम्स के नामकरण को लेकर भी एक स्टैंडर्ड फॉर्मेट निर्धारित किया है। अब MSF के तहत आने वाली योजनाओं के नाम में फंड हाउस का नाम, NPS, कैटेगरी कोड और स्कीम का नाम शामिल करना जरूरी होगा।
अगर स्कीम Tier-2 अकाउंट से जुड़ी है, तो उसके नाम के अंत में ‘Tier 2’ भी लिखा जाएगा। पेंशन फंड्स को नए नियमों के अनुसार अपनी स्कीम्स के नाम में बदलाव करने के लिए 30 दिनों का समय दिया गया है।
एक कैटेगरी में ज्यादा स्कीम्स हुईं तो होगा मर्जर
नए फ्रेमवर्क के तहत कोई भी पेंशन फंड एक ही कैटेगरी में Tier-1 या Tier-2 के तहत अधिकतम दो स्कीम्स ही चला सकेगा।
अगर किसी कैटेगरी में दो से ज्यादा स्कीम्स मौजूद हैं, तो उन्हें 45 दिनों के भीतर मर्ज या रीस्ट्रक्चर करना होगा। हालांकि, ऐसा करने से पहले संबंधित सब्सक्राइबर्स को इसकी जानकारी दी जाएगी।
निवेशकों के लिए क्या बदलेगा?
इस पूरे बदलाव का सबसे बड़ा असर यह होगा कि NPS में निवेश करने वाले लोगों के लिए अलग-अलग स्कीम्स को समझना और उनकी तुलना करना आसान हो जाएगा। स्कीम के नाम, कैटेगरी और इक्विटी एक्सपोजर को ज्यादा व्यवस्थित तरीके से पेश किए जाने से निवेशक अपनी जोखिम क्षमता और निवेश लक्ष्य के मुताबिक बेहतर फैसला ले सकेंगे।

