1994 बैच के पांच अधिकारियों की 31 अगस्त को सेवानिवृत्ति, बल की कमी के कारण जवानों पर बढ़ रहा ड्यूटी का बोझ

रांची: झारखंड पुलिस में अधिकारियों की कमी लगातार बढ़ती जा रही है। वर्ष 2026 के शुरुआती आठ महीनों में अब तक 40 डीएसपी और पुलिस इंस्पेक्टर सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इनमें 15 डीएसपी और 25 इंस्पेक्टर शामिल हैं। अधिकारियों के रिटायरमेंट के साथ ही इन पदों पर रिक्तियां बढ़ गई हैं, जिसका असर पुलिस व्यवस्था और विधि-व्यवस्था संभालने की क्षमता पर पड़ने की आशंका है।
31 अगस्त को वर्ष 1994 में दारोगा के पद पर बहाल बैच के पांच अधिकारी सेवानिवृत्त हुए। इनमें डीएसपी बैजू उरांव, डीएसपी राजेश कुमार और पुलिस इंस्पेक्टर रमेश कुमार सिंह, आशुतोष प्रताप नारायण व अशोक कुमार सिंह शामिल हैं। डीएसपी बैजू उरांव गुमला में पदस्थापित थे, जबकि अन्य अधिकारी भी राज्य के अलग-अलग जिलों में जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
जनवरी में सबसे ज्यादा 16 अधिकारी हुए रिटायर
आंकड़ों के अनुसार, जनवरी महीने में सबसे अधिक 16 पुलिस अधिकारी सेवानिवृत्त हुए। इनमें कई डीएसपी और इंस्पेक्टर शामिल थे। फरवरी और मार्च में तीन-तीन अधिकारियों ने सेवा पूरी की।
मई और जून में पांच-पांच अधिकारियों की सेवानिवृत्ति हुई, जबकि जुलाई में तीन अधिकारी रिटायर हुए। अगस्त में पांच अधिकारियों के सेवानिवृत्त होने के साथ ही आठ महीने का आंकड़ा 40 तक पहुंच गया।
महीनेवार सेवानिवृत्ति का आंकड़ा
- 31 जनवरी: 16 अधिकारी
- 28 फरवरी: 3 अधिकारी
- 31 मार्च: 3 अधिकारी
- 31 मई: 5 अधिकारी
- 30 जून: 5 अधिकारी
- 31 जुलाई: 3 अधिकारी
- 31 अगस्त: 5 अधिकारी
इन सभी सेवानिवृत्तियों में 15 डीएसपी और 25 पुलिस इंस्पेक्टर शामिल हैं।
पहले से बल की कमी, अब अफसरों की रिक्तियां भी बढ़ीं
झारखंड पुलिस के सामने पहले से ही पर्याप्त संख्या में जवानों और कनीय पुलिस पदाधिकारियों की कमी एक चुनौती बनी हुई है। अब वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों के सेवानिवृत्त होने से यह दबाव और बढ़ सकता है।
बल की कमी का असर पेट्रोलिंग से लेकर थानों में नियमित पुलिसिंग तक दिखाई देता है। कई जगहों पर उपलब्ध जवानों से लंबे समय तक ड्यूटी करानी पड़ती है। इससे पुलिसकर्मियों पर काम का दबाव बढ़ने के साथ उनके साप्ताहिक अवकाश पर भी असर पड़ने की स्थिति बनती है।
विधि-व्यवस्था संभालना बन रही चुनौती
डीएसपी और इंस्पेक्टर जैसे पदों पर अधिकारियों की कमी सीधे तौर पर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती है। कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, जांच की निगरानी और पुलिस टीमों के संचालन में इन अधिकारियों की अहम भूमिका होती है।
ऐसे में लगातार हो रही सेवानिवृत्तियों के बाद खाली पदों को समय पर भरना झारखंड पुलिस के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है। अगर रिक्तियों की भरपाई जल्द नहीं हुई, तो पहले से बल की कमी से जूझ रही पुलिस व्यवस्था पर आने वाले दिनों में और दबाव बढ़ सकता है।

