Nepal: भयानक बाढ़ से 1000 से अधिक मौतें, 25 झीलें बेहद संवेदनशील, भारत ने किया अलर्ट
Nepal में 26 अगस्त 2026 को आई विनाशकारी बाढ़ ने पूरे हिमालयी क्षेत्र का ध्यान खींचा है। Nepal के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में अचानक आई इस बाढ़ में 1,000 से अधिक लोगों की मौत हो गई है और सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं । Nepal की इस त्रासदी के बाद भारत के हिमालयी राज्यों में भी चिंता बढ़ गई है, क्योंकि Nepal से निकलने वाली नदियाँ भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश में बहती हैं .
Nepal की भयानक बाढ़: क्या हुआ था?
Nepal की इस आपदा की शुरुआत 25 अगस्त 2026 को हुई, जब Nepal-तिब्बत सीमा के पास एक ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिरा । Nepal में इस मलबे ने ल्हेन्डे नदी को अवरुद्ध कर दिया, जिससे एक अस्थायी झील बन गई . इसके बाद, जब यह प्राकृतिक बांध टूटा, तो पानी, कीचड़ और मलबे की एक विशाल लहर Nepal के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी के किनारे बह निकली .
Nepal के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने इस घटना को Nepal का “सबसे बड़ा मानवीय संकट” बताया। Nepal के गृह मंत्रालय के अनुसार, Nepal के रसुवा, धादिंग, सिंधुपालचोक, दोलखा, नुवाकोट, काठमांडू, ललितपुर, भक्तपुर, मकवानपुर, चितवन, पर्सा, बारा और रौतहट जिले इस बाढ़ से प्रभावित हुए हैं ।
Nepal की बाढ़: भारत के लिए क्यों है खतरा?
Nepal की इस त्रासदी का असर भारत पर भी पड़ सकता है, क्योंकि Nepal से निकलने वाली नदियाँ भारत में बहती हैं। Nepal की त्रिशूली नदी, जो भोटेकोशी नदी का पानी लेती है, आगे चलकर नारायणी नदी में मिल जाती है, और यह नारायणी नदी बिहार में गंडक नदी के रूप में प्रवेश करती है .
Nepal में बाढ़ की सूचना मिलने के बाद बिहार सरकार ने पूरी तरह अलर्ट जारी कर दिया और वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए . Nepal की इस घटना के बाद पश्चिम चम्पारण, पूर्वी चम्पारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जैसे बिहार के जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है । उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, महराजगंज, बलरामपुर, और श्रावस्ती जैसे इलाकों में भी Nepal की बाढ़ को लेकर अलर्ट जारी किया गया है .
Nepal: 25 ग्लेशियल झीलें बेहद संवेदनशील
Nepal की इस घटना ने पूरे हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियल झीलों के खतरे को उजागर किया है। Nepal में भी कई संवेदनशील ग्लेशियल झीलें हैं, जिनके फटने से ऐसी ही तबाही हो सकती है । भारत में हिमालयी क्षेत्रों में करीब 7,500 ग्लेशियल झीलें हैं, जिनमें से लगभग 200 झीलों को संभावित रूप से ज्यादा जोखिम वाली माना जा रहा है । अकेले सिक्किम में 25 झीलों को बेहद संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है .
Nepal की इस घटना के बाद NDMA के पूर्व सदस्य सैयद सफी अहसान रिज़वी ने कहा कि भारत को ग्लेशियल झीलों की निगरानी और अर्ली वार्निंग सिस्टम को और मजबूत करने की जरूरत है .
Nepal की त्रासदी: भारत की तैयारियां
Nepal की घटना के बाद भारत सरकार ने 2023 में सिक्किम में हुई ग्लेशियल झील आपदा के अनुभव के आधार पर अपनी तैयारियों की समीक्षा की है । भारत ने 2023 में सिक्किम की साउथ ल्होनक झील में ग्लेशियल चट्टानों के टूटने से आई बाढ़ के बाद NDMA, CWC, GSI, C-DAC, ITBP और सेना सहित कई एजेंसियों को शामिल करते हुए एक उच्च-स्तरीय समिति बनाई थी । सरकार ने हिमालयी राज्यों में GLOF जोखिम शमन कार्यक्रम के तहत 150 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं .
Nepal की बाढ़: आगे का खतरा
Nepal में आई इस बाढ़ ने एक नई झील भी बना दी है, जो एक बार फिर फट सकती है । Nepal के अधिकारियों ने आशंका जताई है कि 1 से 2 अक्टूबर 2026 के बीच Nepal के इस क्षेत्र में फिर से बारिश हो सकती है, जिससे आपदा प्रभावित इलाकों में और मुश्किलें बढ़ सकती हैं . Nepal में इस नई झील के फटने से कितना नुकसान होगा, यह कहना अभी मुश्किल है, लेकिन Nepal के इस खतरे ने पूरे क्षेत्र को सतर्क कर दिया है .
Nepal की इस भयानक त्रासदी ने पूरे हिमालयी क्षेत्र के लिए एक बड़ी चेतावनी का काम किया है। Nepal में ग्लेशियल झील फटने से आई इस बाढ़ ने साबित कर दिया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमनदों का पिघलना और अस्थिर होना एक गंभीर खतरा है, जिससे Nepal, भारत और पूरे हिमालयी क्षेत्र में ऐसी आपदाओं का खतरा बढ़ गया है। Nepal के इस हादसे ने एक बार फिर याद दिलाया है कि ऐसी घटनाओं के लिए बेहतर निगरानी, अर्ली वार्निंग सिस्टम और क्षेत्रीय सहयोग की कितनी अधिक आवश्यकता है ।
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