EWS और OBC-NCL प्रमाण पत्र को लेकर अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं में अलग नियम लागू करने का दावा, अभ्यर्थियों ने उठाए सवाल

रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी JSSC की भर्ती प्रक्रिया में प्रमाण पत्र की वैधता को लेकर अलग-अलग परीक्षाओं में अलग मापदंड अपनाए जाने का मामला सामने आया है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि EWS और OBC-NCL प्रमाण पत्र के मामले में एक ही आयोग ने अलग-अलग नियुक्तियों में अलग नियम लागू किए। इसका असर कई अभ्यर्थियों के रिजल्ट और नियुक्ति पर पड़ा है।
अभ्यर्थियों के मुताबिक, एक भर्ती में सत्यापन के वर्ष का अपडेटेड प्रमाण पत्र स्वीकार करते हुए नियुक्ति की अनुशंसा की गयी, जबकि दूसरी भर्ती में आवेदन की अंतिम तिथि तक जारी प्रमाण पत्र के साथ सत्यापन वर्ष का प्रमाण पत्र भी मांगा जा रहा है। इसी अंतर को लेकर अभ्यर्थी JSSC की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
विज्ञापन में प्रमाण पत्र को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती के विज्ञापन में EWS और OBC-NCL प्रमाण पत्र को लेकर स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया जाता कि किस वर्ष का प्रमाण पत्र मान्य होगा। आवेदन के दौरान भी कई मामलों में प्रमाण पत्र जमा नहीं कराया जाता।
ऐसे में लंबी चलने वाली भर्ती प्रक्रिया के दौरान प्रमाण पत्र की वैधता को लेकर अलग-अलग नियम लागू होने से अभ्यर्थियों के सामने असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है।
महिला पर्यवेक्षिका भर्ती में हुई नियुक्ति की अनुशंसा
महिला पर्यवेक्षिका नियुक्ति परीक्षा का उदाहरण देते हुए अभ्यर्थियों ने दावा किया कि अपडेटेड EWS और OBC-NCL प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति की अनुशंसा की गयी। कुछ ऐसे अभ्यर्थी भी इसमें शामिल थे, जिनके पास आवेदन वर्ष 2023 का प्रमाण पत्र नहीं था।
इनमें कुछ अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र भी जारी किया गया। हालांकि, बाद में विभागीय स्तर पर कुछ नियुक्तियों को लेकर नोटिस जारी किए जाने की बात भी सामने आयी है।
माध्यमिक आचार्य परीक्षा में कई अभ्यर्थियों का रिजल्ट अटका
दूसरी ओर, माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में प्रमाण पत्र को लेकर अलग स्थिति सामने आने का दावा किया गया है। विभिन्न विषयों के 50 से अधिक अभ्यर्थियों का रिजल्ट रोके जाने की बात कही जा रही है।
अभ्यर्थियों के अनुसार, उनसे आवेदन की अंतिम तिथि और प्रमाण पत्र सत्यापन से संबंधित वित्तीय वर्ष के EWS और OBC-NCL प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं। उर्दू विषय के एक अभ्यर्थी से भी आवेदन की अंतिम तिथि तक या उससे पहले जारी EWS प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने को कहा गया।
अभ्यर्थियों का सवाल- एक आयोग, फिर अलग-अलग नियम क्यों?
अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि प्रमाण पत्र को लेकर कोई निर्धारित मापदंड है, तो उसे सभी भर्ती परीक्षाओं में समान रूप से लागू किया जाना चाहिए। उनका सवाल है कि एक परीक्षा में जिस प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति की अनुशंसा की गयी, उसी तरह के मामले में दूसरी परीक्षा में रिजल्ट क्यों रोका जा रहा है? अभ्यर्थियों ने आयोग से प्रमाण पत्र की वैधता को लेकर स्पष्ट और एक समान नियम जारी करने की मांग की है, ताकि योग्य अभ्यर्थियों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
वित्तीय वर्ष के आधार पर जारी होते हैं प्रमाण पत्र
EWS और OBC-NCL प्रमाण पत्र निर्धारित वित्तीय वर्ष के आधार पर जारी किए जाते हैं। भर्ती प्रक्रिया लंबी होने की स्थिति में आवेदन, प्रमाण पत्र सत्यापन और नियुक्ति के अलग-अलग चरणों में प्रमाण पत्र की वैधता का सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है। ऐसे में भर्ती विज्ञापन में ही प्रमाण पत्र की तारीख, वित्तीय वर्ष और सत्यापन के समय जरूरी दस्तावेजों को स्पष्ट करने की मांग उठ रही है।
भर्ती प्रक्रिया में सुधार के बीच सामने आया मामला
JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर लगातार सवाल उठने के बीच सरकार ने नियुक्ति परीक्षा प्रक्रिया में सुधार के लिए कदम उठाने की बात कही है। ऐसे समय में प्रमाण पत्र को लेकर सामने आया यह मामला परीक्षा व्यवस्था में स्पष्टता और एकरूपता की जरूरत को फिर सामने ला रहा है। अब देखना होगा कि JSSC इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देता है और अलग-अलग नियुक्ति परीक्षाओं में प्रमाण पत्र के नियमों को लेकर कोई समान दिशा-निर्देश जारी करता है या नहीं।

