झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026 की तैयारियां अंतिम चरण में, नृत्य-संगीत से लेकर पारंपरिक खान-पान, पहनावा और हस्तशिल्प तक दिखेगी जनजातीय संस्कृति की विविधता

रांची: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राजधानी रांची एक बार फिर जनजातीय संस्कृति, परंपरा और विरासत के रंग में रंगने जा रही है। झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026 के भव्य आयोजन के लिए मोरहाबादी मैदान में तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। आयोजन स्थल को आकर्षक स्वरूप दिया जा रहा है और देश के विभिन्न हिस्सों से 5 हजार से अधिक कलाकारों के महोत्सव में शामिल होने की उम्मीद है।
एक मंच पर दिखेंगे आदिवासी संस्कृति के कई रंग
महोत्सव में देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले कलाकार अपनी पारंपरिक कला, लोक नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियों से दर्शकों को आदिवासी संस्कृति की विविधता से रूबरू कराएंगे। अलग-अलग जनजातीय समुदायों की परंपराओं और जीवनशैली को भी यहां प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा।
5 हजार से ज्यादा कलाकार बनेंगे आकर्षण
इस बार महोत्सव का प्रमुख आकर्षण देशभर से पहुंचने वाले 5,000 से अधिक कलाकार होंगे। पारंपरिक नृत्य और लोक संगीत के साथ विभिन्न लोक कलाओं को भी मंच मिलेगा। इससे दर्शकों को एक ही आयोजन में देश की अलग-अलग जनजातीय संस्कृतियों को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।
स्वाद से पहनावे तक दिखेगी परंपरा
मोरहाबादी मैदान में सिर्फ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां ही नहीं होंगी, बल्कि पारंपरिक आदिवासी खान-पान, पहनावे, हस्तशिल्प और लोक कला से जुड़े स्टॉल भी लगाए जाएंगे। इनके जरिए आगंतुक जनजातीय समुदायों की कला और जीवनशैली को और करीब से समझ सकेंगे।
विरासत और आधुनिक आयोजन का संगम
झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026 का उद्देश्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ आदिवासी समाज की समृद्ध विरासत, कला, परंपराओं और जीवनशैली को व्यापक मंच देना है। मोरहाबादी मैदान में चल रही तैयारियों के बीच महोत्सव को लेकर लोगों और कलाकारों में उत्साह दिखाई दे रहा है।
विश्व आदिवासी दिवस पर रांची का मोरहाबादी मैदान नृत्य, संगीत, कला, खान-पान और परंपराओं के अनूठे संगम का गवाह बनने के लिए तैयार है।

