Gumla School Case झारखंड के गुमला जिले में एक सरकारी स्कूल की बदहाल स्थिति बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है. पालकोट प्रखंड की डहुपानी पंचायत स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय केसीडीह का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है. इस गुमला स्कूल मामले में बारिश के दौरान छत से लगातार पानी टपकता है और प्लास्टर गिरने की घटनाएं आम हो गई हैं. इसके बावजूद केजी से पांचवीं कक्षा तक के 19 छात्र इसी भवन में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
विद्यालय में दो सरकारी शिक्षक कार्यरत हैं। प्रधानाध्यापक पांडू भगत ने बताया कि भवन की स्थिति बेहद खराब है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. बारिश के समय कक्षाओं में पानी भर जाता है, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण पढ़ाई उसी भवन में जारी रखनी पड़ रही है.
गुमला जिले में स्कूलों की बदहाल स्थिति कोई नई बात नहीं है। पालकोट प्रखंड में ही करनी स्थित राजकीयकृत उच्च विद्यालय सुवाली के नवनिर्मित भवन की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठे हैं. करीब 72 लाख रुपये की लागत से तैयार इस भवन को लेकर विद्यालय प्रबंधन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने निर्माण कार्य को निम्न स्तर का बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. फर्श टूटे हुए हैं, दीवारों पर पुट्टी-प्लास्टर का काम अधूरा है, और शौचालय में लगा बेसिन बेकार पड़ा हुआ है.
इसी तरह, गुमला जिले के रायडीह प्रखंड के कंचोड़ा प्राथमिक विद्यालय को स्वच्छ विद्यालय अभियान के तहत 5 स्टार रेटिंग प्राप्त होने पर जिला स्तर पर सर्वश्रेष्ठ विद्यालय पुरस्कार मिला था और इसे राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए नामित किया गया था, लेकिन यह अपवाद है, आम स्थिति नहीं।
विद्यालय प्रबंधन ने पंचायत, जनता दरबार और जिला प्रशासन सहित संबंधित अधिकारियों को कई बार आवेदन देकर भवन की मरम्मत और नए भवन के निर्माण की मांग की है. हालांकि अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया.
जिला शिक्षा पदाधिकारी के अनुसार, राज्य में लगभग 35,000 सरकारी स्कूल हैं, और उनके रखरखाव में संतुलन बनाए रखना एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती है. रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 3,158 सरकारी स्कूलों में शौचालय हैं, लेकिन पानी और नियमित रखरखाव की कमी के कारण उपयोग में नहीं हैं. झारखंड में लगभग 7,930 स्कूल केवल एक शिक्षक के साथ संचालित हो रहे हैं, जिनमें से अधिकांश प्राथमिक स्कूल हैं.
क्या है पूरा मामला?
गुमला जिले के पालकोट प्रखंड की डहुपानी पंचायत में स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय केसीडीह की हालत बेहद खराब है। इस गुमला स्कूल मामले में भवन जर्जर हो चुका है, जिससे 19 छात्रों की जिंदगी खतरे में है। छत से पानी टपकता है और प्लास्टर गिरता है, लेकिन स्कूल प्रबंधन के पास कोई विकल्प नहीं है।
स्कूल की वर्तमान स्थिति
विद्यालय के प्रधानाध्यापक पांडू भगत ने बताया कि भवन की स्थिति बेहद खराब है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। बारिश के समय कक्षाओं में पानी भर जाता है, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण पढ़ाई उसी भवन में जारी रखनी पड़ रही है.
अधिकारियों को कई बार शिकायत
विद्यालय प्रबंधन ने पंचायत, जनता दरबार और जिला प्रशासन सहित संबंधित अधिकारियों को कई बार आवेदन देकर भवन की मरम्मत और नए भवन के निर्माण की मांग की है. इस गुमला स्कूल मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
छात्रों और अभिभावकों की मांग
विद्यालय के छात्रों ने बताया कि बारिश के दौरान कक्षा में बैठने से डर लगता है। छत से पानी टपकता रहता है और कई जगहों से प्लास्टर गिरता है. ऐसे माहौल में पढ़ाई करना मुश्किल हो जाता है। बच्चों ने सुरक्षित भवन उपलब्ध कराने की मांग की है.
जनप्रतिनिधियों ने उठाई आवाज
विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व मुखिया अनुज सोरेंग ने सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। वहीं वर्तमान मुखिया कमल पहान ने बताया कि वर्ष 2022 में पंचायत मद से भवन की मरम्मत कराई गई थी, लेकिन अब स्थिति फिर गंभीर हो चुकी है. उन्होंने कहा कि यही विद्यालय चुनाव के दौरान मतदान केंद्र भी बनाया जाता है, लेकिन चुनाव के बाद इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं होता.
क्या कर रहा है प्रशासन?
जिला शिक्षा पदाधिकारी के अनुसार, राज्य में लगभग 35,000 सरकारी स्कूल हैं, और उनके रखरखाव में संतुलन बनाए रखना एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती है. हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने कहा कि जर्जर भवनों की सूची भवन निर्माण विभाग को भेज दी गई है, लेकिन फंड की कमी के कारण काम शुरू नहीं हो पाया है.
बाहरी संसाधन
- झारखंड शिक्षा विभाग: https://www.jharkhand.gov.in/school-education
- गुमला जिला प्रशासन: https://gumla.nic.in
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE): https://www.education.gov.in


