पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, नियमों को चुनौती देने की दी सलाह

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नागरिक प्रदर्शनों में पैलेट गन के इस्तेमाल पर केंद्र से मांगा जवाब; कोर्ट ने कहा, पहले से बने नियमों को चुनौती दिए बिना इस्तेमाल पर पूरी रोक का आदेश नहीं दिया जा सकता

नई दिल्ली: नागरिक प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इनकार कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को सलाह दी है कि वे पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति देने वाले मौजूदा नियमों को चुनौती दें। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार से पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर लागू स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) की जानकारी भी मांगी है।

मामले की सुनवाई जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने की। अदालत ने कहा कि जब तक पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति देने वाले पुलिस नियमों को चुनौती नहीं दी जाती, तब तक इसके इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश देना मुश्किल होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने दिए तीन अहम निर्देश

सुनवाई के दौरान अदालत ने मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि पैलेट गन से घायल प्रदर्शनकारियों का इलाज कराया जाए। साथ ही केंद्र सरकार से विरोध-प्रदर्शनों के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले हथियारों और उनके उपयोग से संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा गया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विशेष परिस्थितियों में पुलिस पैलेट गन का इस्तेमाल कर सकती है, लेकिन इसका उपयोग निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के तहत ही होना चाहिए।

रिकॉर्ड सुरक्षित रखने पर कोर्ट का जोर

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि पुलिस के पास पैलेट गन नहीं है और इसका इस्तेमाल नहीं किया जाता। इस पर कोर्ट ने रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की जरूरत पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि पुलिस या सुरक्षा एजेंसियां प्रदर्शन के दौरान किन हथियारों का इस्तेमाल करती हैं और उनके इस्तेमाल की प्रक्रिया क्या है, इससे जुड़े रिकॉर्ड को संरक्षित रखा जाना चाहिए। केंद्र सरकार से यह भी पूछा गया है कि पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) क्या है। कोर्ट ने बल प्रयोग की प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखने की बात कही है।

याचिकाकर्ताओं ने क्या दावा किया?

याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि हाल के प्रदर्शनों के दौरान कई छात्रों के शरीर से मेटैलिक पैलेट निकाले गए। याचिका में दावा किया गया कि प्रदर्शन के दौरान रबर बुलेट और मेटैलिक पैलेट जैसे कम घातक विकल्पों का इस्तेमाल किया गया। याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग में निर्धारित प्रक्रियाओं और नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।

पुलिस रिकॉर्ड में क्या बताया गया?

अखबार में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, पुलिस रिकॉर्ड में वाटर कैनन और लाठीचार्ज का उल्लेख है। दिल्ली पुलिस के डीसीपी रैंक के एक अधिकारी के निर्देश पर बल प्रयोग किए जाने की बात भी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, पैलेट गन से दो बार गोलियां चलाने का उल्लेख है। इसमें एक बार मेटैलिक पैलेट और दूसरी बार प्लास्टिक के इस्तेमाल की बात कही गई है।

छात्रों की ओर से भी उठी जांच की मांग

रिपोर्ट के मुताबिक, पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर छात्रों ने भी सवाल उठाए हैं। छात्रों की ओर से मांग की गई कि मार्च में प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन चलाने, प्रदर्शन और इसके इस्तेमाल से जुड़ी परिस्थितियों की जांच की जाए।

दिल्ली सरकार ने छात्रों पर कार्रवाई नहीं करने का किया ऐलान

इस बीच दिल्ली सरकार ने SOG के छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई नहीं करने का ऐलान किया है। अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के 13 आपराधिक मामलों में शामिल छात्रों को राहत देने की बात कही गई है। हालांकि हिंसा और तोड़फोड़ के आरोपी लोगों को यह राहत नहीं मिलेगी।

कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल पैलेट गन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय उसके इस्तेमाल से जुड़े मौजूदा नियमों, SOP और बल प्रयोग की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित किया है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को जरूरत पड़ने पर अपनी याचिका में संशोधन कर मौजूदा नियमों को चुनौती देने की स्वतंत्रता भी दी है।

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