सारठ में राशन कार्ड नोटिस पर विवाद, बिना लेटर नंबर के शॉकज और अवैध वसूली के आरोप

देवघर/सारठ: देवघर जिले के सारठ प्रखंड में राशन कार्डधारियों को जारी किए जा रहे शॉकज नोटिस को लेकर नया विवाद सामने आया है। आरोप है कि बिना किसी आधिकारिक लेटर नंबर के नोटिस जारी किए जा रहे हैं और कुछ लोगों से कार्रवाई का डर दिखाकर अवैध वसूली भी की जा रही है। मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था और नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, सारठ प्रखंड पहले से ही विभिन्न प्रशासनिक मामलों को लेकर चर्चा में है। इसी बीच राशन कार्डधारियों को बिना लेटर नंबर वाले शॉकज नोटिस दिए जाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में न तो प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को जानकारी है और न ही विभाग की ओर से इस प्रारूप में नोटिस जारी करने का कोई स्पष्ट निर्देश दिया गया है। इसके बावजूद प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (एमओ) चंदन कुमार यादव द्वारा KPI (Key Performance Indicator) डेटा के आधार पर नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
KPI डेटा के आधार पर चिन्हित किए गए लाभुक
केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए KPI डेटा के अनुसार ऐसे राशन कार्डधारियों की पहचान की गई है जिनके पास चार पहिया वाहन है, जो आयकरदाता हैं, जिनकी वार्षिक आय छह लाख रुपये से अधिक है अथवा जो किसी कंपनी के निदेशक हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार सारठ प्रखंड में इस श्रेणी के करीब 465 राशन कार्डधारियों की सूची प्राप्त हुई है। इन्हीं लाभुकों को नोटिस भेजकर उनसे स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है कि वे राशन योजना के लिए पात्र हैं या नहीं।
डीलरों के माध्यम से नोटिस और वसूली का आरोप
पंचायत समिति सदस्य रघुनंदन सिंह ने आरोप लगाया है कि राशन डीलरों के माध्यम से लोगों को बुलाकर उन्हें कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया जा रहा है और इसी बहाने अवैध रूप से पैसे वसूले जा रहे हैं। उनका कहना है कि बिना लेटर नंबर वाले नोटिस प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
BDO ने उठाए प्रक्रिया पर सवाल
प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) चंदन कुमार सिंह ने कहा कि किसी भी सरकारी कार्यालय से जारी पत्र पर पत्र निर्गत संख्या (Letter Number) और तिथि होना अनिवार्य है। बिना लेटर नंबर के कोई भी पत्र जारी होना निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में संबंधित प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा कि बिना लेटर नंबर के नोटिस किस आधार पर जारी किए गए।
जिला आपूर्ति विभाग ने जांच का दिया भरोसा
जिला आपूर्ति पदाधिकारी प्रीतिलता किस्कू ने बताया कि केंद्र सरकार से प्राप्त KPI डेटा के आधार पर चिन्हित राशन कार्डधारियों की जांच की जा रही है। यदि जांच में कोई लाभुक अपात्र पाया जाता है तो नियमानुसार उसका नाम राशन कार्ड पोर्टल से हटाया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सारठ प्रखंड में नोटिस के नाम पर अवैध वसूली की शिकायत सही पाई जाती है तो पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक प्रक्रिया पर उठे सवाल
फिलहाल सारठ में बिना लेटर नंबर के जारी नोटिस और कथित वसूली के आरोप चर्चा का विषय बने हुए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच के बाद प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और क्या नोटिस जारी करने की पूरी प्रक्रिया में कोई अनियमितता सामने आती है।

