रांची विश्वविद्यालय में आयोजित RTI समीक्षा बैठक के दौरान प्रोटोकॉल और अधिकार क्षेत्र को लेकर चर्चा तेज हो गई। वहीं सूचना आयुक्त ने विश्वविद्यालय और संबद्ध कॉलेजों को सात दिनों के भीतर वेबसाइट पर RTI संबंधी अनिवार्य जानकारी उपलब्ध कराने और सभी आवेदनों का 30 दिनों में निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

रांची: रांची विश्वविद्यालय में गुरुवार को आयोजित सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम की समीक्षा बैठक कई कारणों से चर्चा का विषय बन गई। राज्य के नवनियुक्त सूचना आयुक्त डॉ. तनुज खत्री पहली बार पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत विश्वविद्यालय पहुंचे, जहां बैठक के दौरान हुए एक घटनाक्रम ने परिसर में प्रोटोकॉल को लेकर बहस छेड़ दी।
बैठक के दौरान सूचना आयुक्त कुलपति कार्यालय में निर्धारित कुलपति की कुर्सी पर बैठे, जबकि कुलपति प्रो. सरोज शर्मा दूसरी कुर्सी पर अधिकारियों के साथ बैठीं। कुछ समय बाद कुलपति बैठक से चली गईं। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में दिनभर चर्चाओं का दौर चलता रहा और कई अधिकारियों-कर्मचारियों ने इसे प्रोटोकॉल से जुड़ा विषय बताया।
इसी बीच RTI अधिनियम के जानकारों ने सूचना आयोग के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा-25 के तहत आयोग संबंधित संस्थानों से रिपोर्ट मांग सकता है या अधिकारियों को आयोग कार्यालय में बुला सकता है, लेकिन विश्वविद्यालय में जाकर समीक्षा बैठक करने के अधिकार को लेकर कानूनी व्याख्या की आवश्यकता है। हालांकि इस मुद्दे पर राज्य सूचना आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बैठक के दौरान सूचना आयुक्त डॉ. तनुज खत्री ने पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय और सभी संबद्ध कॉलेजों को सात दिनों के भीतर अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर लोक सूचना पदाधिकारी, प्रथम अपीलीय प्राधिकारी, RTI आवेदन प्रक्रिया, शुल्क, आवेदन का पता और अन्य अनिवार्य जानकारियां प्रकाशित करने का निर्देश दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन कॉलेजों में अब तक लोक सूचना पदाधिकारी नियुक्त नहीं किए गए हैं, वहां तत्काल नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही सभी RTI आवेदनों का 30 दिनों के भीतर निस्तारण, उनकी निगरानी के लिए ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करने, अभिलेखों के डिजिटलीकरण तथा परीक्षा परिणाम, उत्तरपुस्तिका, अंकपत्र, डिग्री, छात्रवृत्ति, शुल्क और हॉस्टल से जुड़े मामलों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध समाधान करने के निर्देश दिए।
इसके अलावा विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में नियमित RTI जागरूकता कार्यक्रम चलाने तथा प्रत्येक वर्ष RTI जागरूकता सप्ताह आयोजित करने पर भी विशेष बल दिया गया ।

