
Oil Company: कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, पश्चिम एशिया तनाव से तेल कंपनियों पर बढ़ा दबाव
Oil Company पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखने लगा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल करीब नौ सप्ताह बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। इससे भारतीय तेल कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ने की आशंका है।
Oil Company पर बढ़ेगा लागत का दबाव
कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का सीधा असर भारत की सरकारी तेल विपणन कंपनियों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहीं तो कंपनियों की लागत बढ़ेगी और उनके मुनाफे पर दबाव आएगा। भारत की सबसे बड़ी तेल कंपनी ONGC भी इससे अछूती नहीं रहेगी। ONGC देश की सबसे बड़ी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस कंपनी है । भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत भी बढ़कर 93.19 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। जुलाई की शुरुआत की तुलना में इसमें करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन पर क्या होगा असर?
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड देश की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में से एक है और इसका बाजार में 44.6 प्रतिशत हिस्सा है । कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर IOCL पर पड़ सकता है क्योंकि कंपनी को कच्चा तेल खरीदने के लिए अधिक भुगतान करना होगा। इससे कंपनी के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। सरकारी स्वामित्व वाली अन्य तेल कंपनियों जैसे भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम पर भी इसका असर होगा । ये कंपनियां कच्चे तेल को रिफाइन कर पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पाद बनाती हैं और कीमतों में बढ़ोतरी से इनकी लागत बढ़ेगी।
ईंधन कारोबार पर बढ़ेगी चुनौती
यदि मौजूदा हालात लंबे समय तक बने रहे तो पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की लागत पर असर पड़ सकता है। हालांकि कीमतों को लेकर अंतिम निर्णय सरकार और तेल विपणन कंपनियों की समीक्षा पर निर्भर करेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें अगले कुछ सप्ताह तक ऊंची बनी रहती हैं, तो चालू वित्त वर्ष की दूसरी और तीसरी तिमाही में तेल कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर इसका प्रभाव दिखाई दे सकता है। वैश्विक बाजार की नजर अब पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर टिकी है। यदि क्षेत्रीय तनाव कम नहीं हुआ, तो कच्चे तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जिसका असर दुनिया भर के ऊर्जा बाजार और उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
बाहरी संसाधन
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट: https://mopng.gov.in
Oil company और कच्चे तेल की कीमतों से जुड़े अपडेट के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की वेबसाइट: https://www.iea.org
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