अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने से ब्रेंट क्रूड नौ सप्ताह में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। इससे भारतीय तेल कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ने की आशंका है।

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल करीब नौ सप्ताह बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
भारतीय तेल कंपनियों पर बढ़ेगा दबाव
कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का सीधा असर भारत की सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहीं तो कंपनियों की लागत बढ़ेगी और उनके मुनाफे पर दबाव आएगा।
भारतीय क्रूड बास्केट भी महंगी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी के बीच भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत भी बढ़कर 93.19 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। जुलाई की शुरुआत की तुलना में इसमें करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
ईंधन कारोबार पर बढ़ेगी चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मौजूदा हालात लंबे समय तक बने रहे तो पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की लागत पर असर पड़ सकता है। हालांकि कीमतों को लेकर अंतिम निर्णय सरकार और तेल विपणन कंपनियों की समीक्षा पर निर्भर करेगा।
दूसरी और तीसरी तिमाही पर रहेगी नजर
तेल क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें अगले कुछ सप्ताह तक ऊंची बनी रहती हैं, तो चालू वित्त वर्ष की दूसरी और तीसरी तिमाही में तेल कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर इसका प्रभाव दिखाई दे सकता है।
वैश्विक बाजार की नजर अब पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर टिकी है। यदि क्षेत्रीय तनाव कम नहीं हुआ, तो कच्चे तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जिसका असर दुनिया भर के ऊर्जा बाजार और उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

