होर्मुज रूट पर भारतीय नाविकों की नई तैनाती पर रोक, ईरान-अमेरिका तनाव के बीच सरकार का बड़ा फैसला

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खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा खतरे के बीच भारत सरकार ने शिपिंग कंपनियों और क्रू भर्ती एजेंसियों को जारी किए निर्देश; हालिया हमलों में भारतीय नाविकों की मौत के बाद एहतियाती कदम।

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत सरकार ने भारतीय नाविकों (Seafarers) की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बड़ा फैसला लिया है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) ने अगले आदेश तक होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की नई तैनाती पर रोक लगा दी है। यह आदेश शिपिंग कंपनियों, जहाज प्रबंधन कंपनियों और Recruitment and Placement Service License (RPSL) एजेंसियों पर तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

सरकार ने समुद्री क्षेत्र में काम करने वाली सभी कंपनियों को अरब की खाड़ी, होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी कंपनियों से कहा गया है कि वे नौवहन से जुड़ी सुरक्षा चेतावनियों पर लगातार नजर रखें और International Ship and Port Facility Security (ISPS) Code का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करें। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब हाल के दिनों में होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास हुए हमलों में भारतीय नाविकों की जान गई है। सरकारी और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, हालिया ईरानी हमलों में इस सप्ताह दो भारतीय नाविकों की मौत हुई, जबकि 28 फरवरी से अब तक इस क्षेत्र में हुए हमलों में कम से कम 14 भारतीय नाविकों की जान जा चुकी है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष तेज होने के बाद इस समुद्री मार्ग पर जोखिम काफी बढ़ गया है।

हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह निर्देश केवल भारत से होने वाली नई नियुक्तियों पर लागू होगा। यदि कोई विदेशी शिपिंग कंपनी भारत के बाहर से नाविकों की भर्ती करती है, तो उस पर भारत सरकार का यह आदेश सीधे लागू नहीं होगा। इस बीच होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। समुद्री डेटा कंपनियों के अनुसार, कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां इस समुद्री मार्ग का उपयोग करने से बच रही हैं और कुछ कंपनियां अमेरिकी सुरक्षा एस्कॉर्ट के बावजूद इस रूट पर जहाज भेजने में हिचकिचा रही हैं। इससे वैश्विक तेल और व्यापारिक आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

उधर अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं। अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों और तटीय रक्षा प्रतिष्ठानों पर नए हवाई हमलों का दावा किया है। वहीं ईरान ने भी कुवैत, बहरीन और अन्य क्षेत्रों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले करने का दावा किया है। दोनों देशों की ओर से लगातार आक्रामक बयानबाजी जारी है, जिससे पूरे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है।

इसी दौरान अमेरिका ने सऊदी अरब को लगभग 1.96 अरब डॉलर के आधुनिक हथियारों की बिक्री को मंजूरी दी है। दूसरी ओर ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने कहा है कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ कूटनीतिक बातचीत भी जरूरी है और इसे कमजोरी नहीं माना जाना चाहिए। विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में भारत सरकार द्वारा भारतीय नाविकों की तैनाती रोकने का फैसला केवल सुरक्षा उपाय नहीं बल्कि क्षेत्र में लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए उठाया गया एक महत्वपूर्ण एहतियाती कदम है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि हालात सामान्य होने तक यह निर्देश प्रभावी रहेगा और सुरक्षा स्थिति की लगातार समीक्षा की जाएगी।

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