ISRO से वैज्ञानिकों के इस्तीफों पर सरकार सख्त, गगनयान समेत अहम मिशनों से जुड़े अधिकारियों के लिए बदले नियम

0
81
Share This Post

लगातार इस्तीफों के बीच डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस का बड़ा फैसला, अब राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं से जुड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफों और VRS पर अंतिम निर्णय सीधे DoS करेगा।

नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से लगातार वैज्ञानिकों के इस्तीफों के बीच डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस (DoS) ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। गगनयान और अन्य राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं पर काम कर रहे वैज्ञानिकों के इस्तीफों और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) को लेकर नियमों को सख्त कर दिया गया है। 14 जुलाई को जारी आंतरिक ज्ञापन के तहत अब ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित केंद्र नहीं, बल्कि सीधे डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस करेगा। रिपोर्टों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में 100 से 120 वैज्ञानिक और कर्मचारी इसरो छोड़ चुके हैं। हालांकि विभाग ने आधिकारिक संख्या जारी नहीं की है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक यूआर राव सैटेलाइट सेंटर (URSC) से लगभग 80 और विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) से करीब 20 वैज्ञानिक एवं कर्मचारी इस्तीफा दे चुके हैं। कई अन्य मामलों पर अभी भी प्रक्रिया जारी है।

इस्तीफा देने वालों में कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें VSSC के LVM-3 प्रोजेक्ट डायरेक्टर विक्टर जोसेफ, URSC के SpaDeX मिशन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर और चंद्रयान-3 मिशन से जुड़े एक युवा वैज्ञानिक का नाम भी सामने आया है। इन इस्तीफों ने इसरो के महत्वपूर्ण मिशनों पर मानव संसाधन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने इस्तीफों की पुष्टि करते हुए कहा कि किसी भी संगठन में कर्मचारियों का आना-जाना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन एजेंसी ने यह सुनिश्चित करने की तैयारी कर रखी है कि किसी भी वैज्ञानिक के जाने से राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के लिए वैकल्पिक अधिकारियों को भी तैयार रखा जा रहा है।

हालांकि इसरो में कुल 14,600 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, लेकिन चिंता इस बात को लेकर है कि इस्तीफा देने वाले कई वैज्ञानिक गगनयान, चंद्रयान-3, SpaDeX और LVM-3 जैसे रणनीतिक मिशनों से जुड़े रहे हैं। पिछले वित्तीय वर्ष के अंत तक URSC में 1,339 और VSSC में 4,577 कर्मचारी कार्यरत थे। ऐसे में अनुभवी वैज्ञानिकों का संगठन छोड़ना भविष्य की परियोजनाओं के लिए चुनौती माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि चंद्रयान-3 जैसे मिशनों की सफलता में वैज्ञानिकों की विशेषज्ञता की अहम भूमिका रही है। उदाहरण के तौर पर मिशन के सिमुलेशन से जुड़े वैज्ञानिकों ने लाखों परीक्षणों के आधार पर तैयार किए गए डेटा के जरिए चंद्र लैंडिंग प्रक्रिया को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। ऐसे अनुभवी वैज्ञानिकों का जाना संस्थागत ज्ञान के नुकसान के रूप में भी देखा जा रहा है।

नए आदेश के अनुसार अब गगनयान और अन्य राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं पर कार्यरत वैज्ञानिकों के इस्तीफे या VRS आवेदन सामान्य परिस्थितियों में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। केंद्र निदेशकों को निर्देश दिया गया है कि परियोजना पूरी होने तक ऐसे आवेदनों को मंजूरी न दें। सभी मामलों को उनकी अनुशंसा के साथ अंतिम निर्णय के लिए सीधे डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस भेजा जाएगा। यह फैसला वर्ष 2020 में लागू उस व्यवस्था में बदलाव करता है, जिसके तहत इसरो के विभिन्न केंद्रों के निदेशकों और यूनिट प्रमुखों को ग्रुप-ए वैज्ञानिक एवं तकनीकी अधिकारियों (Scientist/Engineer-SG स्तर तक) के इस्तीफे और VRS स्वीकार करने का अधिकार दिया गया था। अब राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं से जुड़े अधिकारियों के मामलों में यह अधिकार प्रभावी रूप से वापस ले लिया गया है।

गौरतलब है कि इसरो में इस्तीफों का सिलसिला नया नहीं है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2012 से 2024 के बीच लगभग 700 कर्मचारी इसरो छोड़ चुके हैं। वहीं, वर्ष 2004 से 2007 के बीच भर्ती हुए कर्मचारियों में से लगभग आधे बाद में संगठन से अलग हो गए थे। ऐसे में सरकार का नया फैसला इसरो के महत्वपूर्ण मिशनों में विशेषज्ञ मानव संसाधन को बनाए रखने और भविष्य की अंतरिक्ष परियोजनाओं की समयबद्ध सफलता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here