Regional Certificate Fraud: झारखंड में फर्जी प्रमाणपत्रों पर सख्ती, SIR के दौरान सतर्क रहने का निर्देश

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Regional Certificate फर्जी प्रमाणपत्रों पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की सख्ती

झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की आशंका को देखते हुए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों (उपायुक्तों) को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। मंत्रिमंडल (निर्वाचन) विभाग ने गुरुवार को इस संबंध में पत्र जारी किया है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने अपने पत्र में कहा है कि 25 जून को प्रकाशित एक समाचार में पाकुड़ जिले में फर्जी वेबसाइट के माध्यम से जन्म, जाति एवं अन्य महत्वपूर्ण Regional Certificate तैयार करने वाले गिरोह के सक्रिय होने का खुलासा हुआ है। इसके अलावा, पूर्व में भी गोड्डा समेत अन्य जिलों में फर्जी प्रमाण-पत्र बनाए जाने की सूचनाएं विभिन्न माध्यमों से प्राप्त हुई हैं।

क्या हो रही है कार्रवाई?

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने जिला अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं:

  • फर्जी Regional Certificate बनाने वाले गिरोहों के खिलाफ कानून की संगत धाराओं के तहत त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
  • SIR के दौरान मतदाता सूची पुनरीक्षण के लिए जमा किए जाने वाले सभी दस्तावेजों का सत्यापन पूरी सावधानी से किया जाए।
  • फर्जी Regional Certificate जैसे दस्तावेजों से मतदाता सूची को दूषित करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

Special Intensive Revision (SIR) की पूरी प्रक्रिया

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार की अध्यक्षता में गुरुवार को निर्वाचन सदन में सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई। बैठक में SIR कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी PPT प्रस्तुतीकरण के माध्यम से दी गई:

  1. प्रशिक्षण एवं मुद्रण: 20 से 29 जून 2026 तक
  2. बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर फॉर्म वितरण: 30 जून से 29 जुलाई 2026 तक
  3. प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन: 5 अगस्त 2026
  4. आपत्ति प्राप्त करने की अवधि: 5 अगस्त से 4 सितंबर 2026
  5. निष्पादन: 3 अक्टूबर 2026 तक
  6. अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन: 7 अक्टूबर 2026

फर्जी Regional Certificate: क्यों है चिंता का विषय?

फर्जी Regional Certificate (जन्म, जाति, निवास आदि) मतदाता सूची की शुद्धता को प्रभावित कर सकते हैं। इससे कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं:

  • अवैध मतदान: फर्जी Regional Certificate के जरिए अयोग्य व्यक्ति मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं।
  • जाति प्रमाणपत्र का दुरुपयोग: फर्जी जाति प्रमाणपत्र से आरक्षण का लाभ लेने वाले लोग योग्य उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • नागरिकता विवाद: फर्जी Regional Certificate के जरिए विदेशी नागरिक भी मतदाता सूची में शामिल हो सकते हैं।

इसलिए, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने SIR के दौरान फर्जी Regional Certificate पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया है।


अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 7 अक्टूबर को

SIR प्रक्रिया के बाद, 7 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इससे पहले, 5 अगस्त से 4 सितंबर तक प्रारूप मतदाता सूची पर आपत्तियां मांगी जाएंगी, जिनका निष्पादन 3 अक्टूबर तक किया जाएगा।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि फर्जी Regional Certificate जैसे दस्तावेजों को लेकर कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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