
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ तब आया जब राज्य की आपराधिक जांच विभाग (CID) की टीम मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस प्रमुख Mamata Banerjee के कोलकाता स्थित कालीघाट आवास पहुंची। यह कार्रवाई कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच के तहत की गई, जिसने हाल के दिनों में राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।
मामला उस पत्र से जुड़ा है जिसे पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष को भेजा गया था। इस पत्र में तृणमूल कांग्रेस विधायक Sobhandeb Chattopadhyay को विधानसभा में विपक्ष का नेता (Leader of Opposition) चुने जाने का समर्थन दिखाया गया था। आरोप है कि इस पत्र पर कई विधायकों के हस्ताक्षर कथित रूप से फर्जी तरीके से लगाए गए थे।
जांच एजेंसियों के अनुसार, कुछ विधायकों ने दावा किया कि उनके हस्ताक्षरों का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना किया गया। शिकायत दर्ज होने के बाद मामला CID को सौंपा गया और तब से एजेंसी कई नेताओं और विधायकों से पूछताछ कर रही है।
इस मामले में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee को भी कई बार नोटिस जारी किया जा चुका है। CID ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया था, जबकि पार्टी के कई अन्य नेताओं और विधायकों के बयान भी दर्ज किए गए हैं।
CID की टीम ने इससे पहले कोलकाता के कुछ प्रमुख टीएमसी कार्यालयों और वरिष्ठ नेताओं के आवासों पर भी जाकर जानकारी जुटाई थी। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित फर्जी हस्ताक्षर किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में किए गए।
हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने इस पूरे मामले को राजनीतिक साजिश करार दिया है। पार्टी का कहना है कि विपक्षी दल और जांच एजेंसियां राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही हैं। दूसरी ओर, जांच एजेंसियों का कहना है कि वे तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच कर रही हैं।
फिलहाल CID की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह विवाद अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बन गया है।



