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ट्रंप का दावा: Iran is Strong and Proud इसलिए नहीं मान रहा समझौता, युद्ध के बीच अटकी शांति वार्ता

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अबुआ न्यूज़ झारखंड | अंतरराष्ट्रीय डेस्क

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान अभी तक अमेरिका के साथ किसी व्यापक समझौते पर सहमत नहीं हुआ है क्योंकि उसके नेता खुद को अब भी “मजबूत” और “गर्वीला” मानते हैं। ट्रंप का कहना है कि कई महीनों से चल रहे संघर्ष के बाद ईरान को नई वास्तविकता स्वीकार करने में समय लग रहा है।

अमेरिकी मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ईरानी नेतृत्व ऐसी स्थिति में पहुंच चुका है जिसकी उसने कभी कल्पना नहीं की थी। उन्होंने कहा कि ईरान के पास अंततः बातचीत की मेज पर लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

ट्रंप ने क्या कहा?

ट्रंप के अनुसार, ईरान पिछले कई दशकों से क्षेत्रीय राजनीति में अपनी शर्तों पर काम करता रहा है, लेकिन मौजूदा संघर्ष ने उसकी स्थिति को कमजोर किया है।

उन्होंने कहा कि ईरानी नेतृत्व अभी भी यह स्वीकार नहीं कर पा रहा है कि हालात उसके खिलाफ बदल चुके हैं। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान को अंततः समझौते के लिए तैयार होना पड़ेगा, हालांकि इसमें कुछ समय लग सकता है।

आखिर समझौता क्यों नहीं हो पा रहा?

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ महीनों से अप्रत्यक्ष वार्ताएं चल रही हैं। दोनों पक्ष एक अंतरिम समझौते की संभावना तलाश रहे हैं जिससे युद्धविराम कायम रहे और बड़े मुद्दों पर आगे बातचीत की जा सके।

लेकिन कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अब भी सहमति नहीं बन पाई है।

ईरान की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:

  • अरबों डॉलर के तेल राजस्व तक पहुंच
  • अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत
  • कच्चे तेल के निर्यात पर लगी बाधाओं का अंत
  • बंदरगाहों पर अमेरिकी दबाव कम करना
  • होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने प्रभाव को बनाए रखना

विशेषज्ञों का मानना है कि यही मुद्दे शांति समझौते के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य इस संघर्ष का केंद्र बना हुआ है।

संघर्ष शुरू होने के बाद ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर दबाव बढ़ाया, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ गई। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिश

तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी शनिवार को तेहरान पहुंचे। ईरानी मीडिया के अनुसार वे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख की ओर से एक विशेष संदेश लेकर आए थे।

बताया जा रहा है कि उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता और विदेश मंत्री से मुलाकात कर क्षेत्रीय शांति और वार्ता के मुद्दे पर चर्चा की।

बातचीत के साथ-साथ जारी हैं हमले

हालांकि दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है, लेकिन जमीनी स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है।

अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी ड्रोन खतरों को रोकने के बाद ईरान के कुछ तटीय रडार ठिकानों को निशाना बनाया।

वहीं ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि उसने जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

कुवैत ने बताया कि कई मिसाइलें उसके हवाई क्षेत्र से गुजरीं, जिससे कुछ संपत्तियों को नुकसान पहुंचा लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। बहरीन में भी सायरन बजाए गए और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई।

आगे क्या?

विश्लेषकों का मानना है कि दोनों पक्ष फिलहाल पूर्ण युद्ध से बचना चाहते हैं, लेकिन किसी स्थायी समझौते तक पहुंचने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।

जब तक प्रतिबंध, तेल निर्यात, परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे मुद्दों पर सहमति नहीं बनती, तब तक क्षेत्र में तनाव बना रह सकता है। दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका और ईरान आने वाले दिनों में किसी नए समझौते की दिशा में आगे बढ़ पाएंगे।

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