जिनेवा/नई दिल्ली: दुनिया में परमाणु हथियारों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इंटरनेशनल कैंपेन टू एबोलिश न्यूक्लियर वेपन्स (ICAN) द्वारा 26 मार्च 2026 को जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में दुनिया भर में लगभग 10,000 परमाणु हथियार (10000 nuclear weapons worldwide) तैनात हैं, जो युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार हैं .
रिपोर्ट के अनुसार, इन हथियारों की संयुक्त विनाशकारी क्षमता हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से लगभग 1.35 लाख गुना अधिक है . गौरतलब है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा पर हुए परमाणु हमले में लगभग 1.40 लाख लोगों की जान गई थी . आइए जानते हैं इस चिंताजनक रिपोर्ट से जुड़ी हर अहम बात और किस देश के पास कितने हथियार हैं।
10000 nuclear weapons worldwide: ICAN रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

10000 nuclear weapons worldwide के इस आंकड़े के साथ ICAN रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं।
लगातार बढ़ रही परमाणु हथियारों की संख्या
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2017 के बाद से परमाणु हथियारों की संख्या लगातार बढ़ रही है . पिछले साल (2025) में अकेले 141 नए परमाणु हथियार जोड़े गए हैं . यह वृद्धि वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी है।
40 प्रतिशत हथियार तत्काल उपयोग के लिए तैनात
रिपोर्ट के अनुसार, कुल परमाणु हथियारों का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बैलिस्टिक मिसाइलों, मोबाइल लॉन्चरों, पनडुब्बियों और बमवर्षक विमानों पर तैनात है, जो किसी भी समय उपयोग के लिए तैयार हैं . शेष हथियार रिजर्व में रखे गए हैं। इसके अलावा, लगभग 2,500 अतिरिक्त परमाणु हथियार नष्ट किए जाने की प्रक्रिया में हैं .
10000 nuclear weapons worldwide: किन देशों के पास हैं परमाणु हथियार?
10000 nuclear weapons worldwide में से अधिकांश हथियार केवल दो देशों – रूस और अमेरिका – के पास हैं। ICAN रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में कुल 9 देश परमाणु हथियार संपन्न हैं :
10000 nuclear weapons worldwide: अमेरिका और रूस का दबदबा
10000 nuclear weapons worldwide के इस आंकड़े में अमेरिका और रूस का दबदबा सबसे अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के पास दुनिया के कुल परमाणु हथियारों का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा है . अमेरिकी परमाणु हथियार तुर्की, इटली, बेल्जियम, जर्मनी और नीदरलैंड जैसे देशों में भी तैनात हैं, जो इस खतरे को और व्यापक बनाता है .
10000 nuclear weapons worldwide: चीन, भारत, पाकिस्तान समेत अन्य देशों की स्थिति
10000 nuclear weapons worldwide के इस आंकड़े में चीन, भारत, पाकिस्तान और उत्तर कोरिया जैसे देशों के शस्त्रागार भी लगातार विस्तार कर रहे हैं .
- चीन: अपने परमाणु शस्त्रागार को तेजी से बढ़ा रहा है और एक पूर्ण परमाणु त्रय (Nuclear Triad) विकसित कर रहा है .
- भारत: “नो-फर्स्ट-यूज” (No-First-Use) की नीति का पालन करता है और अपनी परमाणु क्षमता का विस्तार कर रहा है .
- पाकिस्तान: सामरिक (Tactical) परमाणु हथियारों पर जोर दे रहा है, जिससे परमाणु युद्ध की दहलीज कम होने की आशंका है .
- उत्तर कोरिया: अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) का परीक्षण जारी रखे हुए है और परमाणु हथियारों का निर्माण कर रहा है .
10000 nuclear weapons worldwide: मध्य-पूर्व तनाव और परमाणु खतरा
10000 nuclear weapons worldwide के इस आंकड़े के बीच मध्य-पूर्व में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव परमाणु खतरे को और गहरा कर रहा है। इज़राइल को पहले से ही एक “अनौपचारिक परमाणु शक्ति” (De Facto Nuclear Power) माना जाता है . ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ती जा रही है, हालांकि ईरान ने बार-बार दावा किया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है .
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टकराव और बढ़ता है, तो यह सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक स्तर पर परमाणु तनाव को जन्म दे सकता है।
10000 nuclear weapons worldwide: समाधान की राह
10000 nuclear weapons worldwide के इस खतरे से निपटने के लिए ICAN जैसी संस्थाएं लगातार परमाणु हथियारों के उन्मूलन की मांग कर रही हैं . संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में बनाई गई परमाणु हथियारों के प्रतिबंध की संधि (Treaty on the Prohibition of Nuclear Weapons – TPNW) 2021 में लागू हुई थी, जिसके लिए ICAN को 2017 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था . 2025 के अंत तक 99 देश इस संधि में शामिल हो चुके हैं .
हालांकि, सभी 9 परमाणु हथियार संपन्न देश इस संधि से बाहर हैं, साथ ही उनके करीबी सहयोगी (जैसे नाटो देश) भी इसमें शामिल नहीं हुए हैं . रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप इस संधि के सार्वभौमिक कार्यान्वयन में सबसे बड़ी बाधा के रूप में खड़ा है .
10000 nuclear weapons worldwide: निष्कर्ष
10000 nuclear weapons worldwide का यह आंकड़ा सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक गंभीर चेतावनी है। हिरोशिमा और नागासाकी की त्रासदी से सबक लेते हुए अब समय आ गया है कि दुनिया शांति की दिशा में ठोस कदम उठाए। जब तक परमाणु हथियार मौजूद हैं, तब तक उनके इस्तेमाल का खतरा भी बना रहेगा। अंतरराष्ट्रीय समझौते, कूटनीति और संवाद ही इस खतरे को कम करने का एकमात्र रास्ता हैं।
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