Saturday, March 14, 2026
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गैस संकट के बीच केंद्र का बड़ा फैसला: Essential Commodities Act लागू, घरेलू और जरूरी सेक्टर को प्राथमिकता

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और LNG सप्लाई में संभावित बाधा के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने Essential Commodities Act, 1955 लागू करते हुए प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को कुछ प्रमुख क्षेत्रों के लिए प्राथमिकता देने का फैसला किया है । यह Essential Commodities Act gas supply के तहत उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने 9 मार्च को जारी गजट अधिसूचना में कहा कि गैस की आपूर्ति को टियर सिस्टम (Tier System) के तहत अलग-अलग सेक्टरों में प्राथमिकता के आधार पर बांटा जाएगा । आइए जानते हैं इस अहम Essential Commodities Act gas supply फैसले से जुड़ी हर अहम बात, किन क्षेत्रों को मिलेगी प्राथमिकता और किन पर होगी कटौती।

Essential Commodities Act gas supply: किन सेक्टरों को मिलेगी प्राथमिकता?

Essential Commodities Act gas supply

Essential Commodities Act gas supply के तहत सरकार के अनुसार निम्न सेक्टरों को प्राथमिकता दी जाएगी:

  • घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG)
  • वाहनों के लिए CNG
  • LPG उत्पादन
  • उर्वरक उद्योग (Fertilizer Plants)
  • चाय उद्योग और अन्य प्रमुख औद्योगिक उपभोक्ता

इन सेक्टरों को उनकी जरूरत के हिसाब से गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी । यह फैसला सुनिश्चित करता है कि आम आदमी की रसोई और जरूरी सेवाएं बाधित न हों।

Essential Commodities Act gas supply: हॉरमुज जलडमरूमध्य से जुड़ी चिंता

Essential Commodities Act gas supply के तहत यह कदम सरकार ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से आने वाली LNG सप्लाई में संभावित बाधा को देखते हुए उठाया है ।

भारत की निर्भरता

भारत की लगभग 30% प्राकृतिक गैस की जरूरत इसी समुद्री मार्ग से पूरी होती है । पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण सप्लाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है । अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव सीधे तौर पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को प्रभावित कर सकता है।

Essential Commodities Act gas supply: किसे कितनी गैस मिलेगी?

Essential Commodities Act gas supply की नई व्यवस्था के तहत अलग-अलग क्षेत्रों के लिए आवंटन का प्रतिशत तय किया गया है।

सेक्टरगैस आपूर्ति (अनुमानित)
घरेलू PNG, CNG और LPG उत्पादन100% तक (उपलब्धता के आधार पर)
उर्वरक उद्योग (Fertilizer Plants)लगभग 70% (आवश्यकता के अनुसार)
अन्य औद्योगिक उपभोक्ताकरीब 80%
रिफाइनरियां और पेट्रोकेमिकल्सपिछले 6 महीने के औसत का 65% (कटौती की संभावना)

रिफाइनरियों को कम मिलेगी गैस

गजट अधिसूचना के मुताबिक LNG सप्लाई में व्यवधान की स्थिति में ONGC Petro Additions, GAIL Pata Petrochemical और रिलायंस O2C (Reliance O2C) जैसी रिफाइनरियों को मिलने वाली गैस में कटौती की जा सकती है । जरूरत पड़ने पर रिफाइनरियों को उनकी पिछले छह महीनों की औसत खपत के करीब 65% तक गैस आपूर्ति दी जाएगी ।

Essential Commodities Act gas supply: भारत की गैस खपत

Essential Commodities Act gas supply के इस फैसले की पृष्ठभूमि में भारत की बढ़ती गैस खपत को समझना जरूरी है।

आयात पर निर्भरता

वर्तमान में भारत की प्राकृतिक गैस खपत लगभग 195 मिलियन मेट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (MMSCMD) है, जिसमें से करीब आधी गैस आयात की जाती है । यह आयात मुख्य रूप से कतर, यूएई और अन्य खाड़ी देशों से होता है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।

Essential Commodities Act gas supply: इस फैसले का असर

Essential Commodities Act gas supply के इस फैसले का असर दूरगामी होगा।

आम जनता को राहत

इस फैसले से सबसे बड़ी राहत आम जनता को मिलेगी। घरेलू PNG और CNG को प्राथमिकता दिए जाने से लोगों की रसोई और वाहनों की गैस सप्लाई बाधित नहीं होगी।

उर्वरक उत्पादन सुनिश्चित

उर्वरक उद्योग (Fertilizer Industry) को प्राथमिकता दिए जाने से किसानों को समय पर खाद मिलती रहेगी और खाद्यान्न उत्पादन प्रभावित नहीं होगा।

उद्योगों पर दबाव

हालांकि, रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल उद्योगों को गैस की कमी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उनके उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

Essential Commodities Act gas supply: निष्कर्ष

Essential Commodities Act gas supply के तहत केंद्र सरकार का यह फैसला एक सतर्कतापूर्ण और रणनीतिक कदम है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, सरकार ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को मजबूत करने और जरूरी सेवाओं को बाधित होने से बचाने के लिए यह कदम उठाया है । घरेलू PNG, CNG और LPG को प्राथमिकता देकर सरकार ने आम आदमी की चिंता को सबसे ऊपर रखा है, जबकि रिफाइनरियों पर कटौती की तलवार लटकाकर औद्योगिक हितों को अस्थायी रूप से पीछे धकेल दिया है । अब देखना यह है कि यह संकट कितना लंबा खिंचता है और यह नीति कितनी कारगर साबित होती है।

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