चतरा/रांची: झारखंड के चतरा जिले में सोमवार शाम एक दर्दनाक विमान हादसे ने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया है। रांची से दिल्ली जा रही एक एयर एंबुलेंस (Air Ambulance) के चतरा के सिमरिया के जंगल में क्रैश हो जाने से उसमें सवार मरीज समेत सभी 7 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई । इस Chatra air ambulance crash ने एक परिवार को पूरी तरह से खत्म कर दिया है, जिससे पूरे इलाके में मातम छा गया है।
यह एयर एंबुलेंस रांची के देवकमल अस्पताल में भर्ती गंभीर रूप से झुलसे मरीज संजय साहू (लगभग 65% झुलसे) को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले जा रही थी। परिजनों ने उनकी जान बचाने के लिए करीब 8 लाख रुपये खर्च कर एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था । आइए जानते हैं इस Chatra air ambulance crash से जुड़ी हर अहम बात।
Chatra Air Ambulance Crash: कैसे हुआ हादसा?


Chatra air ambulance crash का यह हादसा सोमवार, 23 फरवरी 2026 की शाम करीब 7:30 बजे हुआ । रेडबर्ड एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड (Redbird Airways Pvt Ltd) द्वारा संचालित बीचक्राफ्ट सी90 (Beechcraft C90) विमान (VT-AJV) रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से शाम 7:11 बजे दिल्ली के लिए रवाना हुआ था ।
- आखिरी संपर्क: डीजीसीए (DGCA) के अनुसार, विमान का कोलकाता एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से 7:34 बजे संपर्क हुआ था, जिसके बाद यह वाराणसी से लगभग 100 नॉटिकल मील दक्षिण-पूर्व में रडार से गायब हो गया । उड़ान भरने के करीब 20-23 मिनट बाद ही यह हादसा हो गया ।
- मौसम की भूमिका: प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, Chatra air ambulance crash की वजह खराब मौसम को माना जा रहा है। डीजीसीए के बयान में बताया गया है कि विमान ने उड़ान के दौरान मौसम के कारण दिशा बदलने (deviation due to weather) की अनुमति मांगी थी, जिसके बाद उससे संपर्क टूट गया । रांची एयरपोर्ट निदेशक विनोद कुमार ने भी कहा कि खराब मौसम हादसे की वजह हो सकता है, हालांकि जांच के बाद ही सही कारणों का पता चल पाएगा ।
Chatra Air Ambulance Crash: कौन-कौन थे सवार?
इस Chatra air ambulance crash में हम उन 7 लोगों की जान गई, जिनमें मरीज का पूरा परिवार, डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और दोनों पायलट शामिल थे । मृतकों की पहचान इस प्रकार है :
| नाम | उम्र | भूमिका |
|---|---|---|
| संजय कुमार (साहू) | 41 वर्ष | मरीज (65% झुलसे) |
| अर्चना देवी | 35 वर्ष | मरीज की पत्नी |
| ध्रुव कुमार | 17 वर्ष | मरीज का भांजा |
| डॉ. विकास कुमार गुप्ता | – | चिकित्सक (सदर अस्पताल रांची) |
| सचिन कुमार मिश्रा | – | पैरामेडिकल स्टाफ |
| विवेक विकास भगत | – | कैप्टन (पायलट) |
| सौराजदीप सिंह | – | कैप्टन (सह-पायलट) |
कौन थे संजय साहू?
संजय कुमार साहू (41) लातेहार जिले के चंदवा क्षेत्र के रहने वाले थे। उन्हें 16 फरवरी को गंभीर रूप से झुलसी हालत में रांची के देवकमल अस्पताल में भर्ती कराया गया था । शरीर का करीब 65 फीसदी हिस्सा झुलस जाने के कारण उनकी हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी। डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें दिल्ली रेफर कर दिया था ।
डॉ. विकास गुप्ता का दर्दनाक सफर
डॉ. विकास कुमार गुप्ता सदर अस्पताल रांची में तैनात थे। उनके पिता बजरंगी प्रसाद ने बताया कि बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए उन्होंने अपनी सारी जमीन बेच दी थी। “उसका सात साल का बेटा है… वह मेधावी था और उसने ओडिशा के कटक से एमबीबीएस किया था,” पिता ने आंसुओं के बीच बताया ।
Chatra Air Ambulance Crash: रेस्क्यू में आई भारी परेशानी
Chatra air ambulance crash के बाद राहत और बचाव कार्य में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। विमान सिमरिया थाना क्षेत्र के कसारी पंचायत के करमाटांड़ जंगल में दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, जो मुख्य सड़क से करीब 4 किलोमीटर अंदर घने जंगल में था ।
- अंधेरे में चुनौती: हादसा रात के समय हुआ, जिससे बचाव कार्य और मुश्किल हो गया। सशस्त्र सीमा बल (SSB) के द्वितीय कमान रमेश कुमार ने बताया कि दुर्घटनास्थल तक कोई सड़क नहीं थी और लगभग दो किलोमीटर पैदल चलकर जाना पड़ा ।
- स्ट्रेचर से निकाले गए शव: रात के अंधेरे में सिर्फ एक स्ट्रेचर की मदद से शवों को मुख्य सड़क तक लाया गया । जवानों ने कड़ी मशक्कत के बाद सभी शवों को बरामद कर सदर अस्पताल चतरा पहुंचाया, जहां उनका पोस्टमार्टम कराया गया ।
Chatra Air Ambulance Crash: परिजनों का दर्द और सवाल
Chatra air ambulance crash ने मृतकों के परिजनों को ऐसा सदमा दिया है कि उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा।
“पूरा परिवार खत्म हो गया”
मरीज संजय साहू के रिश्तेदार ने बिलखते हुए कहा, “हमने साले (संजय) को अच्छे इलाज के लिए दिल्ली भेजने के लिए प्राइवेट जेट बुक किया था, लेकिन वह क्रैश हो गया… मेरा पूरा परिवार ही खत्म हो गया। दो बच्चे हैं, जो अब अनाथ हो गए हैं ।”
“रांची में इलाज मिलता तो जान बच सकती थी”
संजय की पत्नी अर्चना देवी भी इस हादसे में अपने पति के साथ चल बसीं। उनके परिवार वालों ने सवाल उठाया कि अगर रांची में ही बेहतर इलाज की सुविधा होती, तो इतनी बड़ी त्रासदी नहीं होती। परिजन ने कहा, “अगर हम अपने साले (संजय) को रांची में ही सही इलाज दे पाते, तो सात लोगों की जान बच सकती थी। मैंने इस हादसे में संजय और अपनी बहन अर्चना दोनों को खो दिया ।”
Chatra Air Ambulance Crash: जांच एजेंसियां सक्रिय

Chatra air ambulance crash की गंभीरता को देखते हुए विमानन महानिदेशालय (DGCA) और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने संयुक्त रूप से जांच शुरू कर दी है ।
- ब्लैक बॉक्स की तलाश: जांच एजेंसियां विमान का ब्लैक बॉक्स बरामद करने की कोशिश कर रही हैं, जिससे हादसे के सही कारणों का पता चल सके ।
- रेडबर्ड एयरवेज: दिल्ली स्थित यह कंपनी एक नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर है, जिसके बेड़े में कुल छह विमान हैं ।
- मौसम या तकनीकी खराबी? रांची सांसद और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि जांच के बाद ही पता चलेगा कि हादसा खराब मौसम, मानवीय भूल या तकनीकी खराबी की वजह से हुआ ।
- Chatra Air Ambulance Crash: शोक की लहर
इस Chatra air ambulance crash से पूरे झारखंड में शोक की लहर फैल गई है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता चंपई सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शोक जताते हुए सभी मृतकों की आत्मा की शांति और परिजनों को धैर्य देने की प्रार्थना की । तृणमूल कांग्रेस ने भी इस हादसे पर दुख जताते हुए पारदर्शी जांच की मांग की है ।
Chatra Air Ambulance Crash: टाइमलाइन
- 16 फरवरी: संजय कुमार 65% झुलसी हालत में देवकमल अस्पताल रांची में भर्ती ।
- 23 फरवरी, 4:30 बजे: संजय कुमार को एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाने के लिए अस्पताल से रवाना किया गया ।
- 23 फरवरी, 7:11 बजे: रांची एयरपोर्ट से एयर एंबुलेंस ने उड़ान भरी ।
- 23 फरवरी, 7:34 बजे: कोलकाता ATC से आखिरी संपर्क, इसके बाद रडार से गायब ।
- 23 फरवरी, रात करीब 10 बजे: हादसे की सूचना मिलने के बाद रेस्क्यू टीम जंगल में पहुंची।
- 24 फरवरी: सभी सात शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए ।
Chatra Air Ambulance Crash: निष्कर्ष
Chatra air ambulance crash न केवल एक बड़ा विमानन हादसा है, बल्कि मानवीय त्रासदी की वो दास्तां है जिसमें एक परिवार के तीन लोग, एक होनहार डॉक्टर और दो अनुभवी पायलट शामिल थे। खराब मौसम या तकनीकी खामी जो भी वजह हो, इस घटना ने यह जरूर साबित कर दिया है कि जिंदगी कितनी अनिश्चित है। अब सबकी निगाहें DGCA और AAIB की जांच पर टिकी हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसे न हों और इस परिवार को इंसाफ मिल सके।
External Link: For official updates on aviation safety, visit the Directorate General of Civil Aviation (DGCA) Official Website.
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