Monday, March 16, 2026

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लद्दाख बंद: हजारों लोग सड़कों पर, राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग तेज

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लद्दाख बंद

लेह/कारगिल: लद्दाख में सोमवार को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। क्षेत्र के राजनीतिक संगठनों के आह्वान पर लेह और कारगिल में पूर्ण बंद रहा और हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। लोगों ने बाजारों में मार्च निकालते हुए लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची के तहत संरक्षण देने की मांग उठाई।

लद्दाख के दो प्रमुख संगठनों एपेक्स बॉडी लेह (ABL) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने यह बंद बुलाया था। ये दोनों संगठन केंद्र सरकार के साथ गृह मंत्रालय द्वारा गठित 15 सदस्यीय हाई पावर कमेटी के तहत बातचीत कर रहे हैं।

प्रदर्शन के दौरान लेह और कारगिल के बाजार पूरी तरह बंद रहे। लोगों ने बैनर और पोस्टर लेकर रैलियां निकालीं और अपनी मांगों को जोरदार तरीके से रखा। जांस्कर के दूरदराज इलाकों में भी इस बंद का असर देखा गया।

यह पिछले वर्ष सितंबर में हुए धरना-प्रदर्शनों के बाद क्षेत्र का पहला बड़ा आंदोलन माना जा रहा है। सितंबर में पुलिस फायरिंग में चार लोगों की मौत हो गई थी और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया था। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा उनकी हिरासत समाप्त किए जाने के बाद उन्हें जोधपुर जेल से रिहा किया गया।

एपेक्स बॉडी लेह के सह-अध्यक्ष चेरींग दोरजय लकरूक ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी के बावजूद प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। उन्होंने कहा कि लोगों ने केंद्र सरकार को यह संदेश देने के लिए सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया है कि “हम अपने अधिकारों की मांग से पीछे नहीं हटेंगे।”

क्या हैं लद्दाख की मुख्य मांगें

लद्दाख के संगठनों ने केंद्र सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं:

  • लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए
  • संविधान की छठी अनुसूची के तहत संरक्षण मिले
  • स्थानीय युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण
  • लेह और कारगिल के लिए अलग-अलग संसदीय सीटें

लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग कर केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद से क्षेत्र में लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को लेकर चिंता जताई जा रही है। लेह की स्वायत्त हिल काउंसिल का कार्यकाल नवंबर 2025 में समाप्त हो चुका है, लेकिन अब तक नए चुनाव घोषित नहीं किए गए हैं।

लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा जान ने भी इन प्रदर्शनों का समर्थन किया और कारगिल में आयोजित रैली में शामिल हुए।

स्थानीय नेताओं का कहना है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।

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