क्या दुनिया कुछ बड़े नेताओं के हाथों में सिमट गई है? क्या आम लोग सिर्फ तमाशबीन बनकर रह गए हैं?
दुनिया के बड़े फैसले आज कुछ शक्तिशाली देशों, नेताओं और कॉरपोरेट ताकतों के इर्द-गिर्द घूमते दिखाई देते हैं। ऐसे में सवाल उठता है—क्या आम आदमी की आवाज़ कमजोर पड़ गई है, या लोकतंत्र अब भी उतना ही मजबूत है जितना हम मानते हैं? पढ़िए अबुआ न्यूज झारखंड का विशेष…





