Navratri Begins Today: Goddess Durga Arrives on Palanquin This Year – Know Auspicious Timings & Significance
रांची- टीम अबुआ
आज से पूरे देश में श्रद्धा, आस्था और भक्ति का पर्व चैत्र नवरात्र शुरू हो गया है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस बार नवरात्र का खास महत्व इसलिए भी है क्योंकि मां दुर्गा पालकी पर सवार होकर धरती पर आ रही हैं, जिसे शुभ और सावधानी दोनों के संकेत के रूप में देखा जाता है।

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, मां का आगमन जिस वाहन पर होता है, वह पूरे वर्ष के संकेत देता है। पालकी को जहां कुछ मामलों में सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, वहीं इसे प्राकृतिक असंतुलन या सामाजिक चुनौतियों की चेतावनी भी माना जाता है। ऐसे में भक्तों से विशेष सावधानी और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने की अपील की जाती है।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
नवरात्र की शुरुआत कलश स्थापना के साथ होती है, जो बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। आज सुबह से ही मंदिरों और घरों में पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया है। शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित कर मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है। मान्यता है कि सही समय पर विधि-विधान से पूजा करने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है। चैत्र नवरात्रि 2026 में कलश स्थापना (घटस्थापना) 19 मार्च, गुरुवार को की जाएगी। इसके लिए सबसे उत्तम समय सुबह 06:52 बजे से 07:43 बजे तक है। यदि यह समय छूट जाए, तो आप दोपहर के शुभ अभिजीत मुहूर्त में 12:05 PM से 12:53 PM के बीच कलश स्थापित कर सकते हैं।

नौ दिनों का धार्मिक महत्व
नवरात्र के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है—शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। इन नौ दिनों में व्रत रखने, भजन-कीर्तन करने और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है।
चैत्र नवरात्र की तिथि
• प्रतिपदा (मां शैलपुत्री) – 19 मार्च 2026
• द्वितीया (मां ब्रह्मचारिणी) – 20 मार्च 2026
• तृतीया (मां चंद्रघंटा) – 21 मार्च 2026
• चतुर्थी (मां कूष्मांडा) – 22 मार्च 2026
• पंचमी (मां स्कंदमाता) – 23 मार्च 2026
• षष्ठी (मां कात्यायनी) – 24 मार्च 2026
• सप्तमी (मां कालरात्रि) – 25 मार्च 2026
• अष्टमी (मां महागौरी) – 26 मार्च 2026
• नवमी (मां सिद्धिदात्री) एवं रामनवमी – 27 मार्च 2026
भक्तजन इस दौरान सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं और मन, वचन तथा कर्म से शुद्ध रहने का प्रयास करते हैं। माना जाता है कि इन दिनों की गई साधना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और कष्ट दूर होते हैं।

पालकी पर आगमन और गज यानि हाथी पर प्रस्थान का क्या संकेत?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब मां दुर्गा पालकी पर आती हैं, तो यह समय बदलाव का संकेत देता है। यह वर्ष समाज में उतार-चढ़ाव और कुछ चुनौतियों का संकेत दे सकता है, लेकिन भक्ति और संयम से इन परिस्थितियों को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है। वहीं मां दुर्गा का प्रस्थान हाथी (गज) पर हो रहा है, जिसे धार्मिक मान्यताओं में अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना गया है। सुख-समृद्धि में वृद्धि – समाज और परिवारों में खुशहाली बढ़ती है
इससे अच्छी वर्षा, कृषि उत्पादन में सुधार – किसानों के लिए यह बेहद शुभ माना जाता है ।
क्या करें, क्या न करें
नवरात्र के दौरान घर की साफ-सफाई, पूजा स्थल की पवित्रता और सकारात्मक माहौल बनाए रखना बेहद जरूरी है। लाल रंग को शुभ माना जाता है, इसलिए पूजा में लाल वस्त्र, फूल और चुनरी का उपयोग किया जाता है। साथ ही, इन दिनों झूठ, क्रोध और नकारात्मक सोच से दूर रहने की सलाह दी जाती है। नवरात्र सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और ऊर्जा का उत्सव है। मां दुर्गा के आगमन के साथ ही हर घर में भक्ति, उल्लास और उम्मीद का माहौल बन जाता है। इस बार पालकी पर मां का आगमन हमें सतर्क रहने और सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ने का संदेश दे रहा है।




