
JPSC घोटाले में बड़ा खुलासा: OMR शीट में हेराफेरी, पांच प्रमुख आरोपियों पर CID की चार्जशीट!

JPSC Scam 2026: झारखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित मेधा घोटाले की परतें खुलीं
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली के मामले में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने रांची की अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया है। इसमें तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसी के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
जांच में ओएमआर शीट से छेड़छाड़, गोपनीय उत्तर-कुंजी के कथित दुरुपयोग और अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप सामने आए हैं। इस घटनाक्रम ने झारखंड की प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
किन पांच प्रमुख आरोपियों के नाम सामने आए?
प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, आरोप पत्र में प्रमुख रूप से इन पांच लोगों के नाम शामिल हैं:
- श्वेता कुमारी गुप्ता — JPSC की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक।
- रामवीर सिंह — परीक्षा संचालन एजेंसी TDPL के निदेशक।
- मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी — एजेंसी के मार्केटिंग मैनेजर।
- मोहम्मद उस्मान — एजेंसी कर्मचारी।
- मोहम्मद एबाद — एजेंसी कर्मचारी।
इन सभी की कथित भूमिका की जांच की गई है। आरोप पत्र दाखिल होने का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है। अंतिम निर्णय न्यायालय करेगा।
OMR शीट में कैसे होती थी कथित हेराफेरी?
जांच संबंधी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, परीक्षा की ओएमआर शीट और डिजिटल परिणामों में बदलाव किए जाने का आरोप है।
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कुछ उत्तर पत्रकों को जानबूझकर अधूरा छोड़ा जाता था और बाद में स्कैनिंग या डिजिटल प्रोसेसिंग के दौरान उनमें बदलाव किया जाता था। गोपनीय उत्तर-कुंजी को आधिकारिक रूप से जारी होने से पहले साझा किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं।
सीआईडी की जांच में डिजिटल उपकरणों, दस्तावेजों और फॉरेंसिक साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना गया है।
पैसे लेकर परीक्षा पास कराने का आरोप
मीडिया रिपोर्टों में जांच के आधार पर दावा किया गया है कि अभ्यर्थियों को सफलता दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की मांग की जाती थी।
कुछ रिपोर्टों में प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए लगभग पांच लाख रुपये और अंतिम चयन के नाम पर इससे कहीं अधिक रकम मांगे जाने के आरोप हैं। हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में कथित रकम अलग बताई गई है।
इसलिए इन आरोपों की वास्तविक वित्तीय सीमा और संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी न्यायिक प्रक्रिया में स्पष्ट होगी।
26 अक्टूबर को अदालत में सुनवाई
रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में 26 अक्टूबर 2026 को अदालत में अगली महत्वपूर्ण सुनवाई निर्धारित है। जांच एजेंसी अन्य संदिग्ध व्यक्तियों और कथित लाभार्थियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
इस प्रकरण से जुड़ी आगे की जांच और संभावित पूरक चार्जशीट पर भी नजर रहेगी।
मेहनती अभ्यर्थियों के भविष्य पर सवाल
झारखंड में हजारों युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता के आरोप केवल प्रशासनिक मामला नहीं, बल्कि अभ्यर्थियों के विश्वास और समान अवसर के अधिकार से भी जुड़े हैं।
JPSC मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच में सामने आए आरोपों पर न्यायिक प्रक्रिया क्या निष्कर्ष निकालती है और भविष्य में परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।




