
Haridwar में सूखी गंगा तो सामने आया कचरे का पहाड़! हरकी पैड़ी की तस्वीरों ने उठाए आस्था और स्वच्छता पर सवाल

ABUA NEWS JHARKHAND | 22 अक्टूबर 2026 | उत्तराखंड
Ganga Cleaning in Haridwar: Dry Riverbed Exposes Massive Waste at Har Ki Pauri, Cleanliness Drive Begins
हरिद्वार: जिस गंगा को करोड़ों भारतीय मां मानकर पूजते हैं, जिसकी पवित्र धारा में आस्था की डुबकी लगाने के लिए देश-दुनिया से श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं, उसी गंगा का एक हैरान करने वाला दृश्य इन दिनों सामने आया है। हरकी पैड़ी पर जल प्रवाह कम होने के बाद नदी की तलहटी में प्लास्टिक, पुराने कपड़े, पॉलिथीन और अन्य कचरे का अंबार दिखाई दे रहा है।
सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो ने गंगा की स्वच्छता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आखिर हरिद्वार में गंगा का पानी क्यों कम हुआ?
दरअसल, ऊपरी गंगनहर की सालाना सफाई और मरम्मत के लिए 20 अक्टूबर की रात से जल प्रवाह रोक दिया गया है। यह एक निर्धारित प्रक्रिया है, जिसके दौरान नहर की सफाई, मरम्मत और घाटों से संबंधित आवश्यक कार्य किए जाते हैं।
अधिकारियों के अनुसार, 7 नवंबर की मध्यरात्रि से जलापूर्ति दोबारा शुरू करने और 8 नवंबर की सुबह तक हरकी पैड़ी सहित संबंधित घाटों पर प्रवाह सामान्य करने की योजना है।
इस दौरान श्रद्धालुओं को गंगा स्नान में असुविधा हो रही है। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा टालने की अपील भी की है।
पानी हटा तो सामने आई गंदगी की भयावह तस्वीर
जलस्तर कम होने से गंगा की तलहटी में जमा वह कचरा दिखाई देने लगा, जो सामान्य दिनों में पानी के नीचे छिपा रहता है।
प्लास्टिक की थैलियां, पुराने वस्त्र और पूजा से संबंधित छोड़ी गई सामग्री इस समस्या की गंभीरता को उजागर करती हैं।
यह दृश्य एक बड़ा सवाल उठाता है—क्या गंगा की पवित्रता केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित रह गई है? जिस नदी को हम मां कहते हैं, उसे स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी भी तो हमारी ही है।
7 नवंबर तक विशेष सफाई अभियान
कुंभ मेला 2027 की तैयारियों के बीच हरिद्वार प्रशासन ने विशेष स्वच्छता अभियान शुरू किया है। मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र के नेतृत्व में हरकी पैड़ी से अभियान की शुरुआत की गई।
अभियान के पहले दिन लगभग दो क्विंटल गीला और सूखा कचरा एकत्र किया गया। इसमें नगर निगम, श्रीगंगा सभा और स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
प्रशासन ने सामाजिक संगठनों, व्यापारियों, धार्मिक संस्थाओं और स्थानीय नागरिकों से भी सफाई अभियान में सहयोग की अपील की है।
आस्था के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी
गंगा केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन, पर्यावरण और आजीविका से जुड़ी नदी है।
हरिद्वार की वर्तमान तस्वीरें इस बात की याद दिलाती हैं कि केवल सरकारी सफाई अभियान पर्याप्त नहीं होंगे। श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों और पर्यटकों को भी अपनी आदतों में बदलाव करना होगा।
पूजा सामग्री का उचित निस्तारण, प्लास्टिक का कम इस्तेमाल और घाटों पर कचरा न फेंकने जैसी छोटी पहलें गंगा की स्वच्छता बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।
सवाल यही है—जिस गंगा से हम पवित्रता की कामना करते हैं, क्या उसे प्रदूषण से मुक्त रखने का संकल्प भी ले सकते हैं?




