Saturday, March 14, 2026
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कच्चे तेल की कीमत 3.5 साल के हाई पर, $100 के पार; सरकार बोली—भारत में पेट्रोल-डीजल महंगे नहीं होंगे

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें साढ़े तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं । रविवार (8 मार्च 2026) को ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई , जो इस साल की सबसे बड़ी उछाल है। यह Crude Oil Price Above $100 का स्तर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज में ट्रेडिंग शुरू होते ही कीमतों में करीब 16.5% की उछाल दर्ज की गई और यह 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि शुक्रवार को यह 93 डॉलर पर बंद हुई थी । हालांकि बढ़ती कीमतों के बीच भारत सरकार ने राहत की बात कही है । आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक Crude Oil Price Above $100 के पीछे के कारण, इसके प्रभाव और भारत पर पड़ने वाले असर के बारे में।

Crude Oil Price Above $100: 10 दिनों में 48% तक महंगा हुआ तेल

 Crude Oil Price Above $100

Crude Oil Price Above $100 के इस स्तर तक पहुंचने की रफ्तार चौंकाने वाली है।

10 दिनों का रिकॉर्ड उछाल

ईरान युद्ध के चलते वैश्विक सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है । सिर्फ 10 दिनों के भीतर कच्चे तेल की कीमतों में करीब 48% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है । यह एक दशक में तेल की कीमतों में सबसे तेज उछाल है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट

दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरता है। युद्ध के कारण इस मार्ग पर संकट गहराने से खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई प्रभावित होने लगी है । इस रूट से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है।

Crude Oil Price Above $100: यूएई और कुवैत ने घटाया उत्पादन

Crude Oil Price Above $100 के इस संकट को और गहरा करने वाली बात यह है कि खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख उत्पादक देशों ने अपना उत्पादन कम कर दिया है।

उत्पादन में कटौती

खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद यूएई (UAE) और कुवैत (Kuwait) जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों ने भी उत्पादन कम करना शुरू कर दिया है । समुद्री सप्लाई रूट बाधित होने के कारण तेल के निर्यात में मुश्किलें बढ़ रही हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से ऊपर जा रही हैं ।

सऊदी अरामको ने भी बंद की रिफाइनरी

इससे पहले सऊदी अरब की तेल कंपनी सऊदी अरामको (Saudi Aramco) ने रास तनुरा स्थित अपनी प्रमुख रिफाइनरी को ड्रोन हमले के बाद बंद कर दिया था, जिससे सप्लाई पर और दबाव बढ़ा था।

Crude Oil Price Above $100: भारत सरकार का दावा – पेट्रोल-डीजल नहीं होंगे महंगे

Crude Oil Price Above $100 के बीच सबसे बड़ी राहत भारत सरकार की ओर से आई है।

पर्याप्त स्टॉक का दावा

सरकार के अनुसार देश में कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का 25 करोड़ बैरल से ज्यादा का स्टॉक मौजूद है । यह स्टॉक इतना है कि अगर सप्लाई रुक भी जाए तो 7 से 8 हफ्तों तक देश की जरूरतें पूरी की जा सकती हैं ।

कीमतें बढ़ाने की कोई योजना नहीं

सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने की कोई योजना नहीं है । सरकार का यह बयान आम जनता के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।

Crude Oil Price Above $100: रूस से तेल खरीदता रहेगा भारत

Crude Oil Price Above $100 के बीच भारत के लिए एक और राहत भरी खबर है।

अमेरिका से विशेष लाइसेंस

अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन का विशेष लाइसेंस दिया है, जो 3 अप्रैल तक वैध रहेगा । इससे भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रख सकेगा और देश में सप्लाई पर असर नहीं पड़ेगा ।

सप्लाई डायवर्सिफिकेशन

भारत अपने तेल आयात स्रोतों में विविधता लाकर भी इस संकट से निपट रहा है। रूस के अलावा, भारत अमेरिका, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से भी तेल खरीद रहा है।

Crude Oil Price Above $100: भारत में 4 साल से स्थिर हैं कीमतें

Crude Oil Price Above $100 के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।

पीपीएसी के आंकड़े

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में पिछले चार वर्षों से पेट्रोल-डीजल की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं ।

अंतरराष्ट्रीय तुलना

फरवरी 2022 से फरवरी 2026 के बीच दिल्ली में पेट्रोल की कीमतों में सिर्फ 0.67% की मामूली गिरावट दर्ज की गई है । इसके उलट पाकिस्तान में पेट्रोल 55% और जर्मनी में 22% महंगा हुआ है । यह तुलना बताती है कि भारत सरकार ने वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद कीमतों को नियंत्रित रखा है।

Crude Oil Price Above $100: निष्कर्ष

Crude Oil Price Above $100 ने एक बार फिर दिखा दिया है कि मध्य पूर्व की अस्थिरता का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। हालांकि, भारत ने इस संकट से निपटने के लिए पहले से तैयारी कर रखी है। पर्याप्त रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserve) और रूस से तेल आयात की सुविधा के चलते भारत फिलहाल सुरक्षित है । सरकार के इस दावे से आम जनता को बड़ी राहत मिली है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई जाएंगी । अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह संकट कितना लंबा खिंचता है और क्या सरकार अपना यह वादा निभा पाती है।

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