
गेहूं की कीमतों पर लगाम लगाने की तैयारी, FCI नीलामी में दोगुनी मात्रा में बेचेगा अनाज
नई दिल्ली: देश में गेहूं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और सरकारी भंडार में स्टॉक घटने के बीच केंद्र सरकार ने बाजार में गेहूं की उपलब्धता बढ़ाने की पहल की है। इसके तहत भारतीय खाद्य निगम (FCI) 4 नवंबर को होने वाली साप्ताहिक नीलामी में 1.99 लाख टन गेहूं बिक्री के लिए पेश करेगा। यह मात्रा 28 अक्टूबर को हुई पिछली नीलामी में रखे गए 1.01 लाख टन गेहूं की तुलना में लगभग दोगुनी है। हालांकि, इस फैसले से बाजार में कीमतों पर कितना असर पड़ेगा, इसे लेकर विशेषज्ञों के बीच सवाल बने हुए हैं।
कई राज्यों में गेहूं का आवंटन बढ़ाया गया
30 और 31 अक्टूबर को जारी 22 राज्यों की नीलामी संबंधी निविदाओं के अनुसार, एफसीआई ने कई राज्यों के लिए गेहूं की मात्रा में बढ़ोतरी की है। पंजाब में आवंटन 25 हजार टन से बढ़ाकर 44 हजार टन कर दिया गया है। वहीं, हरियाणा में 12 हजार टन से बढ़ाकर 23 हजार टन और उत्तर प्रदेश में 8 हजार टन से बढ़ाकर 14 हजार टन गेहूं बिक्री के लिए रखा जाएगा।
मध्य प्रदेश के लिए भी गेहूं की मात्रा 6 हजार टन से बढ़ाकर 10 हजार टन कर दी गई है। इस कदम का उद्देश्य बाजार में गेहूं की आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों में तेजी को नियंत्रित करना है।
असम, दिल्ली और कर्नाटक को भी मिलेगी ज्यादा मात्रा
एफसीआई ने असम, दिल्ली और कर्नाटक के लिए गेहूं का आवंटन बढ़ाकर प्रत्येक राज्य में 12 हजार टन कर दिया है। इससे पहले इन राज्यों के लिए 5-5 हजार टन गेहूं निर्धारित किया गया था।
इसी तरह गुजरात और राजस्थान के लिए 8-8 हजार टन गेहूं रखा गया है। पिछली नीलामी में गुजरात के लिए 4,500 टन और राजस्थान के लिए 4 हजार टन गेहूं उपलब्ध कराया गया था।
तमिलनाडु और पुडुचेरी के लिए भी बढ़ा आवंटन
दक्षिण भारत में गेहूं की आपूर्ति बढ़ाने के लिए तमिलनाडु और पुडुचेरी के आवंटन में भी इजाफा किया गया है। इन दोनों क्षेत्रों के लिए गेहूं की मात्रा 4 हजार टन से बढ़ाकर 10,200 टन कर दी गई है। राज्यों के लिए आवंटन बढ़ाने के जरिए सरकार बाजार में अनाज की उपलब्धता बेहतर करने का प्रयास कर रही है।
पिछली नीलामी में लगभग पूरा गेहूं बिका
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 28 अक्टूबर को हुई नीलामी में एफसीआई ने बिक्री के लिए 1.01 लाख टन गेहूं पेश किया था। इसमें से 99,316 टन गेहूं की बिक्री हुई। यह कुल उपलब्ध मात्रा का लगभग 98.3 प्रतिशत था। कई राज्यों में नीलामी के लिए रखी गई पूरी मात्रा बिक गई थी।
पिछली नीलामी में गेहूं की लगभग पूरी मात्रा बिकने से बाजार में इसकी मांग का संकेत मिला है। ऐसे में अगली नीलामी में आपूर्ति बढ़ाने का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, गेहूं की कीमतों में वास्तविक गिरावट कितनी होगी, यह बाजार की मांग, उपलब्धता और नीलामी में होने वाली खरीद पर निर्भर करेगा।




