रामगढ़: रामगढ़ जिले के पतरातू प्रखंड अंतर्गत सुदूरवर्ती बटुका गांव में रविवार को ऐतिहासिक जीवन जोड़ी कार्तिक मेला पूरे उत्साह और उल्लास के साथ आयोजित किया गया। मेले में परंपरा, लोक संस्कृति और सामाजिक समरसता की अनूठी झलक देखने को मिली। रामगढ़, हजारीबाग, रांची और चतरा जिले से हजारों की संख्या में महिला-पुरुष और युवक-युवतियां मेले में शामिल हुए।
सुबह से ही उमड़ने लगी थी लोगों की भीड़
मेले को लेकर सुबह से ही लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। धीरे-धीरे मेला परिसर लोगों की भारी भीड़ से भर गया। दूर-दराज के गांवों से पहुंचे लोगों ने मेले का आनंद लिया। पूरे आयोजन स्थल पर उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
जीवनसाथी चुनने की परंपरा ने बढ़ाया मेले का महत्व
जीवन जोड़ी कार्तिक मेले की खासियत केवल मनोरंजन और खरीदारी तक सीमित नहीं है। यह मेला सामाजिक रिश्तों को मजबूत करने के साथ विवाह योग्य युवक-युवतियों को अपना जीवनसाथी चुनने का पारंपरिक अवसर भी प्रदान करता है। इस दौरान कई युवक-युवतियों ने एक-दूसरे को पसंद किया और परिवार के सदस्यों की सहमति से विवाह के रिश्ते तय किए। इस अनूठी परंपरा ने मेले के ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व को एक बार फिर सामने ला दिया।
नागपुरी गीत-संगीत ने बांधा समां
मेले के अवसर पर आयोजित नागपुरी सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध नागपुरी गायक इगनेश कुमार की शानदार प्रस्तुति से हुई। इसके बाद नारायण नायक, अभिनाश नायक, सरिता बड़ाईक और रिमपल कुमारी समेत अन्य कलाकारों ने अपनी गायकी और नृत्य से दर्शकों का मनोरंजन किया।
नचनी दल की प्रस्तुति पर झूमे दर्शक
बुड़मु से पहुंचे नचनी दल का पारंपरिक नृत्य कार्यक्रम का विशेष आकर्षण बना। उनकी मनमोहक प्रस्तुति देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक जुटे। नागपुरी गीतों और पारंपरिक धुनों पर युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी झूमते नजर आए। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियों और उत्साह के साथ उनका हौसला बढ़ाया।
इस तरह बटुका गांव का ऐतिहासिक जीवन जोड़ी कार्तिक मेला लोक परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक रिश्तों के संगम के रूप में उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ।





