
डिजिटल ठगी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बैंकों की लापरवाही पर ग्राहकों को मिलेगा मुआवजा!
सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में बैंकों की जवाबदेही को लेकर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि यदि बैंकों की लापरवाही के कारण ग्राहकों को आर्थिक नुकसान होता है, तो पीड़ितों को मुआवजा मिलना चाहिए। डिजिटल ठगी पर अंकुश लगाने के लिए बैंकों को अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभानी होगी।
संदिग्ध लेनदेन पर तुरंत कार्रवाई करें बैंक
पीठ ने कहा कि किसी खाते में संदिग्ध लेनदेन सामने आने पर बैंक को तत्काल सतर्कता बरतनी चाहिए। ऐसी स्थिति में खाते से लेनदेन को कुछ समय के लिए रोकने, संबंधित अधिकारियों को सूचना देने और खाताधारक से संपर्क कर लेनदेन की पुष्टि करने जैसे कदम उठाए जाने चाहिए। इससे संभावित धोखाधड़ी को समय रहते रोका जा सकता है।
‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों में पुलिस को भी दें सूचना
कोर्ट ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी साइबर धोखाधड़ी की आशंका पर भी चिंता जताई। ऐसी स्थिति में बैंकों को सतर्कता दिखाते हुए आसपास के पुलिस थानों को भी सूचना देनी चाहिए, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके और लोगों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।
आरबीआई से केवाईसी दिशानिर्देशों पर मांगा ब्योरा
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से प्रस्तावित केवाईसी दिशानिर्देशों की जानकारी मांगी है। इसके साथ ही कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए किए जा सकने वाले उपायों का विवरण भी तलब किया है। इस पहल का उद्देश्य साइबर ठगी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना और पीड़ित ग्राहकों के हितों की रक्षा करना है।




