
दुनिया का पहला वैक्यूम क्लीनर बिजली से नहीं, हाथों से चलता था, ऐसे शुरू हुई सफाई की इस मशीन की कहानी
आज घर की सफाई का आसान जरिया बन चुका वैक्यूम क्लीनर कभी हाथ से चलाया जाता था। 1860 के दशक से शुरू हुई तकनीक की यह यात्रा इलेक्ट्रिक और पोर्टेबल मशीन तक कैसे पहुंची, जानिए पूरी कहानी।

Ranchi: आज के समय में घर की सफाई के लिए वैक्यूम क्लीनर एक आम उपकरण बन चुका है। धूल, मिट्टी से लेकर पालतू जानवरों के बाल तक साफ करने वाली इस मशीन में अब कई आधुनिक फीचर्स मिलते हैं। लेकिन इसकी शुरुआत आज की हाईटेक मशीनों जैसी बिल्कुल नहीं थी।
वैक्यूम क्लीनर के शुरुआती दौर में बिजली का इस्तेमाल नहीं होता था। इसे हाथ की ताकत से चलाना पड़ता था। इसके पीछे की कहानी 19वीं सदी के उस दौर से जुड़ी है, जब शहरों के विस्तार और घरों में कालीन व अपहोल्स्ट्री के बढ़ते इस्तेमाल ने सफाई को पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण बना दिया था।
1860 के दशक में हुई पहली कोशिश
औद्योगिक क्रांति के दौरान शहरी इलाकों का विस्तार तेजी से हुआ। मध्यमवर्गीय घरों में कालीन और अपहोल्स्ट्री का चलन बढ़ा, जिसके साथ धूल और गंदगी साफ करने की समस्या भी बढ़ने लगी।
इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए 1860 के दशक में हाथ से चलने वाले मैकेनिकल कारपेट क्लीनर बनाने की कोशिश हुई। इन मशीनों में धूल खींचने के लिए बेलोज यानी धौंकनी का इस्तेमाल किया जाता था।
Whirlwind में हाथ से बनाना पड़ता था सक्शन
इसके बाद 1870 के दशक में आइव्स मैकगैफी ने “Whirlwind” नाम की स्वीपिंग मशीन का पेटेंट कराया। यह मशीन भी बिजली के बिना काम करती थी।
इसमें सक्शन पैदा करने के लिए हाथ से घुमाए जाने वाले पंखे का इस्तेमाल किया जाता था। मशीन को चलाना आसान नहीं था, क्योंकि इसे आगे बढ़ाने के साथ ऑपरेटर को हाथ से लीवर भी घुमाना पड़ता था।
कारपेट स्वीपर से मोटर वाली मशीन तक
इसी दौर में मेलविले बिसेल ने घूमने वाले पहियों और ब्रश वाला कारपेट स्वीपर विकसित किया। यह धूल और गंदगी को साफ करके मशीन के अंदर जमा करता था। फिर 1899 में जॉन एस. थर्मन ने पेट्रोल से चलने वाला मोटराइज्ड वैक्यूम क्लीनर बनाया। हालांकि शुरुआती मोटराइज्ड मशीनों में कालीन की गहराई तक सफाई करने की क्षमता सीमित थी।
बिजली से चलने वाले उपकरण सामने आने के बाद भी मैनुअल कारपेट स्वीपर लंबे समय तक इस्तेमाल किए जाते रहे। इसकी बड़ी वजह उनकी कम कीमत और बिजली पर निर्भर न होना था।
1901 में आया पहला इलेक्ट्रिक वैक्यूम क्लीनर
अगर पहले इलेक्ट्रिक वैक्यूम क्लीनर की बात करें तो इसका श्रेय ह्यूबर्ट सेसिल बूथ को दिया जाता है। उन्होंने 1901 में इलेक्ट्रिक वैक्यूम क्लीनर का पेटेंट कराया।
हालांकि, यह आज के पोर्टेबल वैक्यूम जैसा नहीं था। मशीन को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना संभव नहीं था। इसे घर या उस जगह के बाहर रखा जाता था जहां सफाई करनी होती थी और लंबे पाइप खिड़कियों के जरिए अंदर पहुंचाए जाते थे।
हूवर ने वैक्यूम क्लीनर को घर-घर पहुंचाया
अमेरिका में 1920 के दशक के दौरान हूवर के वैक्यूम मॉडल को घरेलू काम आसान करने वाले उपकरण के तौर पर प्रचारित किया गया। इसका उद्देश्य खासतौर पर मध्यमवर्गीय परिवारों में सफाई के काम को कम मेहनत वाला बनाना था। धीरे-धीरे वैक्यूम क्लीनर घरेलू इस्तेमाल का हिस्सा बनने लगा और इसकी तकनीक में लगातार बदलाव होते गए।
ऐसे बना पहला सफल पोर्टेबल इलेक्ट्रिक वैक्यूम
वैक्यूम क्लीनर को पोर्टेबल बनाने में जेम्स मरे स्पैंगलर का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने एक पुराने पंखे की मोटर, झाड़ू के हैंडल से जुड़े एक डिब्बे और धूल इकट्ठा करने के लिए तकिए के कवर का इस्तेमाल कर पोर्टेबल इलेक्ट्रिक वैक्यूम तैयार किया।
बाद में उन्होंने इसका पेटेंट विलियम हूवर को बेच दिया। इसी तकनीक के आधार पर 1922 में हूवर कंपनी की शुरुआत हुई।
इसके बाद मोटर, सक्शन सिस्टम, फिल्टर और डिजाइन में लगातार बदलाव किए गए। यही तकनीकी विकास आगे चलकर उन आधुनिक वैक्यूम क्लीनर्स तक पहुंचा, जिनका इस्तेमाल आज घरों और दफ्तरों की सफाई में किया जाता है।




