
BRICS Summit 2026: मोदी-पुतिन की बड़ी मुलाकात, ऊर्जा-रक्षा से व्यापार तक भारत-रूस ने तय किया नया रोडमैप

नई दिल्ली: BRICS शिखर सम्मेलन से ठीक पहले भारत और रूस ने अपने पुराने रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करने का स्पष्ट संकेत दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शुक्रवार, 11 सितंबर को नई दिल्ली में हुई महत्वपूर्ण बैठक में ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, समुद्री सुरक्षा और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्षों पर विस्तार से चर्चा हुई।
भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों नेताओं ने भारत-रूस के बीच “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। यह दोनों नेताओं की दो सप्ताह के भीतर दूसरी मुलाकात थी, जिससे यह भी संकेत मिलता है कि तेजी से बदलते वैश्विक हालात के बीच नई दिल्ली और मॉस्को लगातार संपर्क बनाए रखना चाहते हैं।
ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर खास जोर
मोदी-पुतिन वार्ता में ऊर्जा और रक्षा सहयोग प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा। रूस लंबे समय से भारत का महत्वपूर्ण रक्षा साझेदार रहा है, वहीं पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में भी दोनों देशों के संबंध काफी बढ़े हैं।
भारत और चीन रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हैं। पश्चिमी प्रतिबंधों और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भारत ने लगातार यह तर्क दिया है कि देश की विशाल आबादी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए सुरक्षित, किफायती और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति आवश्यक है।
2026 में भारतीय कच्चे तेल के आयात में रूस की हिस्सेदारी बढ़ी और जुलाई में यह रिकॉर्ड 51 प्रतिशत तक पहुंच गई। मध्य-पूर्व से तेल आपूर्ति में व्यवधान के चलते भी भारतीय रिफाइनरियों की रूसी तेल पर निर्भरता बढ़ी।
भारत का रुख यह रहा है कि वैश्विक राजनीतिक तनाव के बावजूद ऊर्जा, धातु और उर्वरक जैसी जरूरी वस्तुओं के व्यापार को पूरी तरह संघर्षों से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
पश्चिम एशिया और ब्लैक सी संघर्ष पर चर्चा
दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया और ब्लैक सी क्षेत्र में जारी संघर्षों पर भी चर्चा हुई। इन संघर्षों का असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर पड़ा है और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि संघर्षों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। भारत ने शांति प्रयासों में सहयोग देने की अपनी प्रतिबद्धता भी जताई।
भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नई दिल्ली एक साथ अमेरिका, रूस, खाड़ी देशों, ईरान और इजरायल जैसे अलग-अलग वैश्विक शक्तिकेंद्रों के साथ अपने संबंध बनाए रखती है। ऐसे में भारत की विदेश नीति लगातार रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती का सामना कर रही है।
BRICS Summit से पहले मुलाकात के बड़े मायने
मोदी और पुतिन की यह बैठक ऐसे समय हुई जब नई दिल्ली BRICS नेताओं के वार्षिक शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रही है। सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई प्रमुख नेताओं के शामिल होने का कार्यक्रम है।
BRICS अब केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं रहा है। इसका विस्तार वैश्विक कूटनीति, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, नई वित्तीय व्यवस्था और विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने तक हो चुका है।
हालांकि संगठन के सदस्य देशों के बीच विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मतभेद भी मौजूद हैं। इसके बावजूद भारत लगातार BRICS को बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था में सहयोग के मंच के रूप में आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
2030 तक 100 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
भारत और रूस ने अपने द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। 2024-25 में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 70 अरब डॉलर के स्तर पर था।
ऊर्जा के अलावा रक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, भारी इंजीनियरिंग, खनन, बैंकिंग, टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्र भविष्य में भारत-रूस आर्थिक सहयोग के नए आधार बन सकते हैं।
मोदी और पुतिन ने भारत-रूस औद्योगिक प्रदर्शनी का भी दौरा किया, जहां रूसी कंपनियों ने AI, विमानन, अंतरिक्ष, परमाणु विज्ञान, भारी इंजीनियरिंग, खनन और बैंकिंग से जुड़ी तकनीकों और क्षमताओं का प्रदर्शन किया।
पुतिन को मोदी ने भेंट किया ‘तिरुक्कुरल’
इस मुलाकात का एक सांस्कृतिक पहलू भी चर्चा में रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को महान तमिल ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद भेंट किया।
तिरुवल्लुवर द्वारा रचित तिरुक्कुरल में 1,330 दोहे हैं, जिनमें सदाचार, शासन व्यवस्था और प्रेम जैसे विषयों पर विचार दिए गए हैं। इस सांस्कृतिक उपहार को भारत और रूस के बीच संबंधों में सिर्फ सामरिक या आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव के प्रतीक के रूप में भी देखा जा रहा है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है रूस?
रूस भारत के लिए कई स्तरों पर महत्वपूर्ण रहा है। रक्षा उपकरणों और सैन्य तकनीक से लेकर परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष सहयोग तक, दोनों देशों के संबंध दशकों पुराने हैं।
बदलते वैश्विक समीकरणों में भारत अब अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ भी अपने रणनीतिक संबंधों को तेजी से मजबूत कर रहा है, लेकिन इसके साथ उसने रूस के साथ अपने पुराने रिश्तों को बनाए रखा है।
यही भारत की मौजूदा विदेश नीति की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है—किसी एक शक्ति समूह पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग देशों के साथ अपने राष्ट्रीय हित के आधार पर संबंध विकसित करना।
रूस से सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, जबकि रक्षा और रणनीतिक सहयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से अहम बना हुआ है।
क्या संदेश देती है मोदी-पुतिन मुलाकात?
BRICS Summit से पहले हुई इस बैठक का सबसे बड़ा संदेश यह है कि वैश्विक तनाव और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद भारत और रूस अपने संबंधों को कमजोर नहीं होने देना चाहते।
ऊर्जा और रक्षा से लेकर व्यापार, तकनीक और कूटनीति तक दोनों देश सहयोग के नए रास्ते तलाश रहे हैं। साथ ही भारत एक बार फिर यह संदेश दे रहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के समाधान के लिए सैन्य टकराव के बजाय संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देता है।
आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को पूरा करने के लिए दोनों देश कौन से नए समझौते और निवेश योजनाएं आगे बढ़ाते हैं।
BRICS की मेजबानी कर रहा भारत इस समय दुनिया की प्रमुख शक्तियों के बीच संवाद के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है और मोदी-पुतिन की यह मुलाकात उसी बड़े कूटनीतिक परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।




