कागजी हस्ताक्षर वाली प्रक्रिया होगी खत्म, IFMS के ई-वाउचर सिस्टम से होगा भुगतान; हर महीने करीब ₹3,205 करोड़ का सरकारी खर्च

रांची: झारखंड में सरकारी भुगतान की पूरी व्यवस्था अब डिजिटल होने जा रही है। 1 सितंबर से राज्य सरकार के सभी प्रकार के बिलों का भुगतान ई-साइन या डिजिटल सिग्नेचर के जरिए किया जाएगा। इसके बाद वेतन, यात्रा भत्ता और विभिन्न सरकारी अग्रिमों समेत दूसरे बिलों के भुगतान के लिए कागजी प्रक्रिया स्वीकार नहीं की जाएगी।
इस संबंध में वित्त विभाग की संयुक्त सचिव ज्योति कुमारी झा ने आदेश जारी कर दिया है। सभी निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों यानी DDO को डिजिटल भुगतान व्यवस्था लागू करने के लिए जरूरी तैयारियां पूरी करने का निर्देश दिया गया है।
किन-किन बिलों का भुगतान होगा डिजिटल?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद सरकारी कर्मचारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिल डिजिटल माध्यम से ही प्रोसेस किए जाएंगे। इसमें वेतन बिल, आकस्मिक व्यय, यात्रा भत्ता यानी TA, हाउस बिल्डिंग एडवांस और मोटर कार एडवांस समेत अन्य संबंधित बिल शामिल हैं। यानी अब इन बिलों पर कागज पर हस्ताक्षर कराने और फाइलों के जरिए भुगतान की प्रक्रिया की जगह डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल किया जाएगा।
IFMS के ई-वाउचर सिस्टम का बढ़ेगा दायरा
वित्त विभाग का यह फैसला राज्य के डिजिटल वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। पहले ही 7 मार्च 2024 के एक संकल्प के जरिए राज्य सरकार के कर्मचारियों के वेतन और SNA-SPARSH के तहत आने वाली केंद्र प्रायोजित योजनाओं की राशि के भुगतान के लिए पेपरलेस व्यवस्था का प्रावधान किया गया था।
अब इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम यानी IFMS के तहत ई-वाउचर व्यवस्था का दायरा और बढ़ाया जा रहा है।
मेकर-चेकर और अधिकृत अधिकारी होंगे तैनात
नई डिजिटल व्यवस्था को लागू करने के लिए सभी विभागों में अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को नामित किया जाएगा। इसके अलावा डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट यानी DSC से जुड़े काम के लिए विभागीय स्तर पर मेकर और चेकर की भी नियुक्ति की जाएगी। संबंधित अधिकारियों की जानकारी वित्त विभाग को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है, ताकि डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से लागू किया जा सके।
हर महीने हजारों करोड़ रुपये का सरकारी भुगतान
झारखंड सरकार के स्तर पर हर महीने अलग-अलग मदों में औसतन करीब ₹3,205 करोड़ का सरकारी खर्च होता है। सालाना आधार पर यह राशि करीब ₹38,456 करोड़ बैठती है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा कर्मचारियों के वेतन पर खर्च होता है।
वेतन पर हर महीने 1800 से 2000 करोड़
राज्य सरकार अपनी कुल राजस्व प्राप्ति का करीब 16 प्रतिशत हिस्सा वेतन पर खर्च करती है। हर महीने औसतन ₹1,800 से ₹2,000 करोड़ वेतन मद में खर्च होते हैं। इसके बाद पेंशन पर भी बड़ी राशि खर्च होती है।
पेंशन पर 800 से 900 करोड़ रुपये
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कुल राजस्व प्राप्ति का करीब 7 प्रतिशत हिस्सा पेंशन पर खर्च होता है। हर महीने पेंशन मद में लगभग ₹800 से ₹900 करोड़ का भुगतान किया जाता है। वहीं, ऋण के ब्याज और दूसरे मदों में भी सरकार को हर महीने करीब ₹500 से ₹600 करोड़ खर्च करने पड़ते हैं।
क्या बदलेगा 1 सितंबर से?
1 सितंबर से सरकारी भुगतान की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। बिलों को कागज पर हस्ताक्षर कराकर आगे बढ़ाने की जगह डिजिटल सिग्नेचर और ई-वाउचर सिस्टम के जरिए भुगतान किया जाएगा।
इससे कागजी काम कम होने के साथ बिलों की प्रोसेसिंग और वित्तीय रिकॉर्ड को डिजिटल तरीके से ट्रैक करना आसान होगा।
यानी अब झारखंड में सरकारी भुगतान की फाइलें कागजों के ढेर से निकलकर डिजिटल सिस्टम में पहुंचने वाली हैं। 1 सितंबर से लागू होने वाली यह व्यवस्था वेतन से लेकर TA और सरकारी एडवांस तक के भुगतान के तरीके को पूरी तरह बदल देगी।

