सरकार से तीसरे दौर की वार्ता के बाद आंदोलन समाप्त करने का ऐलान। FIR, मुआवजा और परीक्षा सुधार समेत कई मुद्दों पर बनी सहमति।

नई दिल्ली: छात्रों के आंदोलन को लेकर चल रहे लंबे गतिरोध के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। केंद्र सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपना आंदोलन वापस लेने की घोषणा कर दी है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों पर सहमति जताई है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार के साथ सकारात्मक बातचीत हुई है और सभी प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक अपने घर लौटने की अपील की गई है। उन्होंने कहा कि आगे की रणनीति की जानकारी बाद में साझा की जाएगी।
CJP के अनुसार, सरकार ने आंदोलन और प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों पर कई महत्वपूर्ण आश्वासन दिए हैं। इनमें आंदोलनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज पुराने मामलों को वापस लेने, जंतर-मंतर और 20 जुलाई के प्रदर्शन से जुड़े लोगों के खिलाफ भविष्य में किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं करने तथा परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए सौंपे गए 5-सूत्रीय मांग पत्र पर विचार करने की बात शामिल है।
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP नेता सौरव दास ने कहा कि सरकार के साथ बनी सहमति और तय समय-सीमा के भीतर शर्तों को लागू किए जाने के भरोसे के आधार पर आंदोलन वापस लिया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार अपने सभी वादों को समय पर पूरा करेगी।

वार्ता के बाद केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने CJP प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में जेपी नड्डा ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने आंदोलन से जुड़े चार प्रमुख बिंदुओं का लिखित प्रस्ताव सरकार को सौंपा था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित परिवारों को नियमों और प्रावधानों के अनुसार अधिकतम संभव मुआवजा दिया जाएगा।
CJP ने अपनी ओर से सरकार को चार प्रमुख मांगें सौंपी थीं, जिनमें आंदोलनकारियों पर प्रतिशोधात्मक कार्रवाई रोकना, पीड़ितों को मुआवजा देना, दर्ज मामलों पर राहत और परीक्षा सुधार से जुड़े सुझावों पर विचार शामिल था। वहीं सरकार ने भरोसा दिलाया कि आंदोलन से जुड़े मामलों में कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी और पहले से दर्ज मामलों से संबंधित जानकारी भी प्रतिनिधिमंडल को उपलब्ध कराई जाएगी।

