देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास का होगा शुभारंभ, विवाह समेत सभी मांगलिक कार्यों पर लगेगा विराम।

रांची: आज आषाढ़ शुक्ल पक्ष की हरिशयनी (देवशयनी) एकादशी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु चार माह के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसके साथ ही चातुर्मास की शुरुआत हो जाती है।
धार्मिक परंपरा के अनुसार, चातुर्मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। उन्हें शंख, चक्र, गदा और पद्म से अलंकृत कर पीतांबर अर्पित किया जाता है तथा पंचामृत से अभिषेक के बाद धूप, दीप, पुष्प और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं।
पूजन के अंत में भगवान विष्णु की आरती उतारकर पान-सुपारी अर्पित की जाती है और उन्हें शयन कराया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि हरिशयनी एकादशी का व्रत रखने से पापों का नाश होता है, दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व माना गया है।
आज सुबह 11:58 बजे तक एकादशी तिथि रहेगी, जिसके बाद द्वादशी तिथि प्रारंभ होगी। राजधानी रांची सहित राज्य के विभिन्न विष्णु मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जा रहा है।
इसके अलावा 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा मनाई जाएगी, जबकि 30 जुलाई से सावन माह का शुभारंभ होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चातुर्मास के दौरान साग का त्याग करने का भी विशेष विधान बताया गया है।

