CID का दावा, सरकारी नौकरी में रहते हुए परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी एजेंसी से संबंध रखकर खुद, पत्नी और भाई की नियुक्तियों में अनियमितताओं की जांच जारी।

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) भर्ती अनियमितता मामले में CID की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। इस मामले में गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों में शामिल अभय कुमार तिवारी को जांच एजेंसी पूरे नेटवर्क का अहम कड़ी मान रही है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और एजेंसी विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है। CID के अनुसार अभय तिवारी वर्तमान में गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर कार्यरत था। इससे पहले वह परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी TSR Data Processing Pvt. Ltd. में प्रबंधकीय जिम्मेदारी निभा चुका था। जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि परीक्षा प्रक्रिया और एजेंसी के बीच उसके संबंधों का भर्ती प्रक्रिया पर कितना प्रभाव पड़ा।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि अभय तिवारी ने JPSC की कई परीक्षाएं उत्तीर्ण की थीं। साथ ही उसके भाई और पत्नी की सरकारी नियुक्तियों की भी जांच की जा रही है। CID यह पता लगाने में जुटी है कि इन नियुक्तियों में कहीं नियमों का उल्लंघन या किसी प्रकार की अनियमितता तो नहीं हुई। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि JSSC की परीक्षा आयोजित करने के लिए जिस कंपनी ने टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया था, उसमें अभय तिवारी कथित रूप से अलग नाम से अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर रहा था। एजेंसी इस पूरे मामले में दस्तावेजों और टेंडर प्रक्रिया की भी जांच कर रही है।
इस मामले में CID ने JPSC की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, TSR Data Processing Pvt. Ltd. के निदेशक रामवीर सिंह, मोहम्मद उस्मान, मोहम्मद इबाद और अभय कुमार तिवारी को गिरफ्तार किया है। सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों के नियंत्रण एवं निवारण) अधिनियम, 2023 के तहत मामला दर्ज किया गया है। CID ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। यदि जांच के दौरान नए साक्ष्य या अन्य व्यक्तियों की भूमिका सामने आती है, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल एजेंसी भर्ती प्रक्रिया, दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है।

