JPSC भर्ती घोटाले में बड़े खुलासे, CBI ने कहा: जांच में छिपाए गए अहम रिकॉर्ड और नहीं मिला पूरा सहयोग

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CBI की चार्जशीट में दावा किया गया है कि JPSC अधिकारियों ने जांच में पूरा सहयोग नहीं किया। इंटरव्यू प्रक्रिया, OMR स्कैनिंग, एजेंसी चयन और रिकॉर्ड प्रबंधन में गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दो वर्ष पहले अदालत में दाखिल चार्जशीट में कई ऐसे खुलासे किए गए हैं, जो भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और जांच में सहयोग न मिलने की ओर इशारा करते हैं।

चार्जशीट के अनुसार, JPSC में केवल भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियां ही नहीं हुईं, बल्कि जांच के दौरान आयोग के कुछ अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां और रिकॉर्ड गोपनीयता का हवाला देकर उपलब्ध नहीं कराए। CBI का कहना है कि इससे जांच प्रभावित हुई।

इंटरव्यू और रिकॉर्ड पर उठे सवाल

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इंटरव्यू बोर्ड के गठन, सदस्यों के चयन और अभ्यर्थियों के मूल्यांकन से जुड़े रिकॉर्ड जांच एजेंसी को नहीं दिए गए। साथ ही यह जानकारी भी साझा नहीं की गई कि आयोग के अधिकारियों या सदस्यों के रिश्तेदार परीक्षा में शामिल हुए थे या नहीं।

OMR स्कैनिंग प्रक्रिया पर संदेह

CBI ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि OMR शीट की स्कैनिंग एक निजी कंप्यूटर के माध्यम से की गई। जांच के दौरान वह कंप्यूटर बरामद नहीं हो सका, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए।

एजेंसी चयन में कथित अनियमितता

जांच में यह भी सामने आया कि दूसरी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के लिए चयनित एजेंसी के चयन संबंधी दस्तावेज रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं थे। प्रस्तुत किए गए एक पत्र को जांच के दौरान बैकडेटेड होने का संदेह जताया गया।

मुख्य परीक्षा मूल्यांकन पर भी सवाल

चार्जशीट में दावा किया गया है कि मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन गर्मी की छुट्टियों के दौरान विश्वविद्यालय की औपचारिक अनुमति के बिना कराया गया। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी प्रश्न उठे हैं।

इंटरव्यू अंकों में असामान्य अंतर

CBI के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में अलग-अलग सदस्यों द्वारा दिए गए अंकों में अत्यधिक अंतर पाया गया। जांच एजेंसी ने इसे सामान्य मूल्यांकन प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माना।

2006-08 की भर्तियों पर गंभीर आरोप

रिपोर्ट में उल्लेख है कि वर्ष 2006 से 2008 के बीच डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी, सेल्स टैक्स ऑफिसर सहित कई पदों पर भर्ती के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। जांच के आधार पर चार दर्जन से अधिक आरोपियों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र सहित विभिन्न धाराओं में कार्रवाई की सिफारिश की गई।

हालांकि, यह भी उल्लेखनीय है कि CBI ने यह चार्जशीट दो वर्ष पहले अदालत में दाखिल कर दी थी, लेकिन मामले में अब तक ट्रायल शुरू नहीं हो पाया है। दूसरी ओर, हाल की CID कार्रवाई के बाद JPSC की भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर जांच के दायरे में आ गई है।

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