जगन्नाथ मेले में बढ़ी रौनक, झूलों और क्राफ्ट बाजार में उमड़ी श्रद्धालुओं व पर्यटकों की भीड़

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मौसीबाड़ी मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए लगी लंबी कतारें। जगन्नाथ महोत्सव में 150 कला दलों के 2,000 से अधिक कलाकारों ने नागपुरी, छऊ, संताली, मुंडारी और अन्य लोक कलाओं से बांधा समां।

रांची: राजधानी रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथ मेले में हर दिन श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है। मंगलवार को भी मेला परिसर सुबह से देर शाम तक लोगों की भारी भीड़ से गुलजार रहा। एक ओर श्रद्धालुओं ने मौसीबाड़ी मंदिर में पूजा-अर्चना कर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद लिया, वहीं दूसरी ओर झूले, क्राफ्ट बाजार और विभिन्न दुकानों पर लोगों की खूब भीड़ देखने को मिली।

मौसीबाड़ी मंदिर में लगी श्रद्धालुओं की कतार

सुबह से ही श्रद्धालु मौसीबाड़ी मंदिर पहुंचने लगे। पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ के रथ की पूजा की और मौली बांधकर सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में दिनभर भक्तों की लंबी कतार लगी रही।

झूलों और बाजार में दिखी रौनक

मेले में लगे झूलों का बच्चों और युवाओं ने जमकर आनंद लिया। वहीं हस्तशिल्प और क्राफ्ट बाजार में लोगों ने पारंपरिक उत्पादों, सजावटी सामान और स्थानीय हस्तनिर्मित वस्तुओं की खरीदारी की। खानपान की दुकानों पर भी दिनभर अच्छी भीड़ रही।

लोक संस्कृति की शानदार प्रस्तुति

जगन्नाथ महोत्सव के दूसरे दिन झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की रंगारंग झलक देखने को मिली। कार्यक्रम की शुरुआत सितारवादक देवप्रिय ठाकुर ने सितार वादन से की। पहले सत्र में रांची, सरायकेला, खूंटी और दुमका से आए कलाकारों ने नागपुरी लोकगीत, सरायकेला छऊ, करमा, मुंडारी नृत्य, झूमर, पाइका, संताली नृत्य, पांता नृत्य, ध्रुपद, कजरी और आधुनिक नागपुरी गायन की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।

दूसरे सत्र में रांची, खूंटी और बोकारो के सांस्कृतिक दलों ने छऊ नृत्य-नाटिका, उरांव एवं संताली लोकनृत्य, कथक, पंचपरगनिया गायन और आधुनिक नागपुरी गीतों से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

कलाकारों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रस्तुति देने वाले कलाकारों को पद्मश्री मधु मंसूरी हंसमुख, देवदास विश्वकर्मा, मनपूरन नायक, राकेश रमण, प्रभात महतो और बंदी उरांव ने सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन सरोज झा और संतोष मृदुला ने किया।

150 कला दल, 2,000 से अधिक कलाकार ले रहे हिस्सा

आयोजकों के अनुसार इस वर्ष जगन्नाथ महोत्सव में 150 सांस्कृतिक दलों के 2,000 से अधिक कलाकार भाग ले रहे हैं। आगामी दिनों में भी विभिन्न जिलों के कलाकार अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से झारखंड की लोक कला और परंपराओं को मंच पर जीवंत करेंगे।

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