
रांची | अबुआ न्यूज़ झारखंड डेस्क
मध्य अफ्रीका के देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार अब तक 452 पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं, जबकि 82 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण अब सामुदायिक स्तर पर फैलने लगा है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।
इबोला का यह प्रकोप मई 2026 में घोषित किया गया था और महज कुछ ही सप्ताहों में मामलों में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है। संक्रमण मुख्य रूप से कांगो के इतुरी और उत्तर किवु प्रांतों में फैला है, हालांकि पड़ोसी देश युगांडा में भी कुछ मामले सामने आए हैं।
क्या है इबोला?
इबोला एक अत्यंत घातक वायरल बीमारी है, जिसमें तेज बुखार, कमजोरी, उल्टी, दस्त और गंभीर मामलों में आंतरिक एवं बाहरी रक्तस्राव हो सकता है। यह संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक द्रवों के संपर्क से फैलता है।
विशेषज्ञों की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि इस बार फैला बुंडीबुग्यो (Bundibugyo) स्ट्रेन अपेक्षाकृत दुर्लभ है और इसके लिए अभी कोई व्यापक रूप से स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
WHO और CDC ने जताई चिंता
WHO ने इस प्रकोप को रोकने के लिए छह महीने की व्यापक रणनीति शुरू की है। वहीं अमेरिका की CDC (Centers for Disease Control and Prevention) ने चेतावनी दी है कि यदि संक्रमण को जल्द नहीं रोका गया तो यह 2014-16 के पश्चिम अफ्रीका इबोला संकट जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।
क्या भारत के लिए कोई खतरा है?
फिलहाल भारत में इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है और न ही स्वास्थ्य मंत्रालय ने किसी विशेष आपात स्थिति की घोषणा की है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय यात्राओं और वैश्विक संपर्कों के कारण स्वास्थ्य एजेंसियां स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं।
भारत ने अफ्रीका को इबोला से निपटने के लिए आपातकालीन चिकित्सा सहायता भी भेजी है। अफ्रीका CDC ने भारत की मदद के लिए सार्वजनिक रूप से धन्यवाद दिया है।
भारत पर संभावित प्रभाव
- अफ्रीकी देशों से आने वाले यात्रियों की स्वास्थ्य जांच बढ़ सकती है।
- अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स पर निगरानी कड़ी की जा सकती है।
- स्वास्थ्य मंत्रालय और हवाई अड्डा प्राधिकरण अतिरिक्त सावधानी बरत सकते हैं।
- यदि संक्रमण कई देशों में फैलता है तो वैश्विक यात्रा और व्यापार पर असर पड़ सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में भारत में आम जनता के लिए घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है।
क्यों चिंताजनक है यह प्रकोप?
कांगो के जिन इलाकों में संक्रमण फैला है, वहां पहले से ही संघर्ष, गरीबी और कमजोर स्वास्थ्य ढांचा मौजूद है। कई क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियों के कारण स्वास्थ्यकर्मियों को काम करने में कठिनाई हो रही है, जिससे संक्रमण रोकने के प्रयास प्रभावित हो रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन, अफ्रीका CDC और कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां मिलकर संक्रमण को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही हैं। आने वाले सप्ताह यह तय करेंगे कि यह प्रकोप सीमित रहेगा या वैश्विक चिंता का बड़ा कारण बनेगा।



