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ईरान युद्ध पर ट्रंप को बड़ा झटका, अमेरिकी संसद ने सैन्य कार्रवाई रोकने के पक्ष में किया मतदान
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ईरान युद्ध पर अमेरिकी संसद में बगावत! ट्रंप को झटका, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने युद्ध समाप्त करने के पक्ष में किया मतदान

By Team Abua
June 5, 2026 4 Min Read
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वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और सैन्य संघर्ष को लेकर अमेरिकी राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित करते हुए ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई समाप्त करने की मांग की है। 215-208 के अंतर से पारित इस प्रस्ताव ने न केवल ट्रंप प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है, बल्कि अमेरिकी संविधान और राष्ट्रपति की युद्ध संबंधी शक्तियों पर भी नई बहस छेड़ दी है।

इस प्रस्ताव के समर्थन में सभी डेमोक्रेट सांसदों ने मतदान किया, जबकि चार रिपब्लिकन सांसदों ने भी अपनी पार्टी से अलग जाकर इसका समर्थन किया। यह संकेत माना जा रहा है कि ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप की अपनी पार्टी के भीतर भी असंतोष बढ़ रहा है।

क्या है पूरा मामला?

अमेरिका और इज़राइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था। इसके बाद फारस की खाड़ी और विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास लगातार तनाव बना हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल परिवहन का प्रमुख मार्ग माना जाता है।

युद्ध शुरू होने के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई और अमेरिका समेत कई देशों में ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली। अमेरिकी नागरिकों पर इसका सीधा असर पड़ा है, जिसके कारण अब युद्ध को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है।

ट्रंप का दावा- युद्ध पहले ही समाप्त हो चुका

दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह दावा करते रहे हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध अप्रैल में हुए युद्धविराम (सीजफायर) के साथ ही समाप्त हो चुका है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि 8 अप्रैल से लागू युद्धविराम के बाद युद्ध की स्थिति समाप्त हो गई थी और इसलिए “वार पॉवर्स एक्ट” के तहत निर्धारित समय सीमा लागू नहीं होती।

हालांकि आलोचकों का कहना है कि यदि युद्ध समाप्त हो चुका है तो फिर होर्मुज क्षेत्र में अब भी सैन्य गतिविधियां क्यों जारी हैं और शांति समझौता अभी तक क्यों नहीं हो पाया है। यही सवाल अब कांग्रेस और विपक्ष भी उठा रहा है।

क्या है War Power Act?

1973 में पारित “वार पॉवर्स एक्ट” के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति बिना कांग्रेस की मंजूरी के सीमित अवधि तक ही सैन्य कार्रवाई जारी रख सकते हैं। यदि 60 दिनों के भीतर कांग्रेस की अनुमति नहीं मिलती है तो राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई समाप्त करनी होती है।

ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को शुरू हुए 60 दिनों से अधिक समय बीत चुका है। इसी आधार पर कांग्रेस के कई सदस्य ट्रंप प्रशासन पर कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगा रहे हैं।

रिपब्लिकन सांसदों की बगावत क्यों महत्वपूर्ण?

चार रिपब्लिकन सांसदों द्वारा प्रस्ताव का समर्थन करना राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

केंटकी के सांसद थॉमस मैसी लंबे समय से इस युद्ध के विरोधी रहे हैं। उन्होंने मतदान के बाद कहा कि अमेरिकी जनता महंगे पेट्रोल और डीजल से परेशान हो चुकी है।

मैसी ने कहा, “लोग 5 डॉलर प्रति गैलन पेट्रोल और 6 डॉलर प्रति गैलन डीजल से तंग आ चुके हैं। किसान महंगे उर्वरकों की वजह से परेशान हैं और जनता इस युद्ध की कीमत चुका रही है।”

पेंसिल्वेनिया के सांसद ब्रायन फिट्जपैट्रिक ने भी संविधान का हवाला देते हुए कहा कि यदि कानून मौजूद है तो उसका पालन होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि या तो कानून बदलिए या उसका पालन कीजिए, लेकिन उसका उल्लंघन स्वीकार नहीं किया जा सकता।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर युद्ध का असर

ईरान संघर्ष का सबसे बड़ा असर ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत 4.24 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है, जबकि कैलिफोर्निया जैसे राज्यों में यह 6 डॉलर प्रति गैलन के करीब है।

आर्थिक विश्लेषण संस्था मूडीज़ एनालिटिक्स का अनुमान है कि ऊर्जा कीमतों में वृद्धि के कारण अमेरिकी परिवारों पर लगभग 100 अरब डॉलर का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है।

डेमोक्रेट्स का हमला

हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के वरिष्ठ सदस्य ग्रेगरी मीक्स ने प्रस्ताव पारित होने के बाद कहा कि कांग्रेस अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभा रही है।

उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन संविधान के अनुरूप कार्य नहीं करता है तो कांग्रेस का दायित्व है कि वह सरकार पर नियंत्रण और संतुलन बनाए रखे।

अब आगे क्या होगा?

हालांकि प्रतिनिधि सभा में प्रस्ताव पारित हो चुका है, लेकिन इसे अभी सीनेट से भी मंजूरी मिलनी बाकी है। यदि सीनेट भी इस प्रस्ताव का समर्थन करती है तो यह ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ा राजनीतिक झटका होगा।

फिर भी कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि केवल इस प्रस्ताव के पारित होने से युद्ध तुरंत समाप्त नहीं होगा। अंतिम निर्णय इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी अदालतें और प्रशासन वार पॉवर्स एक्ट की व्याख्या किस प्रकार करते हैं।

फिलहाल स्थिति यह है कि ट्रंप प्रशासन दावा कर रहा है कि युद्ध समाप्त हो चुका है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य अब भी बंद है, सैन्य गतिविधियां जारी हैं और कोई स्थायी शांति समझौता नहीं हुआ है। ऐसे में यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या वास्तव में युद्ध खत्म हो गया है या फिर केवल उसका नाम बदल गया है।

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    #DonaldTrump#USCongressamericancongressinternationalbreakingusiranwar
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