महंगी गैस और बेरोजगारी का डबल झटका: मजदूरों का शहरों से पलायन तेज

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Rising LPG prices India
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नई दिल्ली/सूरत: देश में बढ़ती महंगाई और एलपीजी गैस (LPG Gas) की कीमतों में लगातार इजाफा अब आम लोगों, खासकर प्रवासी मजदूरों (Migrant Workers) के लिए बड़ी समस्या बनता जा रहा है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि हजारों मजदूर शहर छोड़कर अपने गांव लौटने को मजबूर हो रहे हैं । यह Rising LPG prices India का वह दौर है, जो कोविड लॉकडाउन के बाद सबसे बड़े रिवर्स माइग्रेशन (Reverse Migration) का कारण बनता दिख रहा है।

सूरत, दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद जैसे बड़े शहरों से लौट रहे मजदूरों का कहना है कि “गैस इतनी महंगी हो गई है कि खाना बनाना मुश्किल हो गया है, ऊपर से काम भी नहीं मिल रहा” । आइए जानते हैं इस Rising LPG prices India से जुड़ी हर अहम बात।

Rising LPG prices India: ‘न गैस, न खाना, न रोजगार’ – क्यों हो रहा है पलायन?

Rising LPG prices India के चलते शहरों में रहना प्रवासी मजदूरों के लिए अब असंभव होता जा रहा है। आजमपुर मंडी (Azadpur Mandi), एशिया की सबसे बड़ी थोक सब्जी मंडियों में से एक, इस संकट का सजीव उदाहरण है .

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कालाबाजारी ने बढ़ाई मुश्किल

कई प्रवासी मजदूरों के पास शहर में रहने के लिए जरूरी दस्तावेज (दस्तावेज़) नहीं होते, जिससे वे रेगुलर (रजिस्टर्ड) एलपीजी कनेक्शन नहीं ले पाते . इसका फायदा उठाकर कालाबाजारी (Black Marketing) करने वाले गैस सिलेंडर को आधिकारिक दर से कई गुना अधिक कीमत पर बेच रहे हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि दिल्ली के बवाना, दाबड़ी, सीतापुरी, बेगमपुर और रोहिणी जैसे इलाकों में कालाबाजारी के मामले सामने आए हैं . एक मजदूर के अनुसार, उन्हें गैस ₹300 से ₹450 प्रति किलो तक मिल रही है, जो आम आदमी की पहुंच से बाहर है .

‘लकड़ी के चूल्हे पर लौटने को मजबूर’

30 वर्षीया मीना सिंह ने बताया कि उनका एलपीजी एक हफ्ते पहले खत्म हो गया और अब उन्होंने नया चूल्हा (चूल्हा) बना लिया है। उनके पति रोजाना मजदूरी करते हैं, लेकिन गैस सिलेंडर खरीदना अब उनके बस में नहीं है . “सात साल पहले मोदी जी एलपीजी अपनाने की बात कर रहे थे, देखिए आज हमें चूल्हे पर लौटना पड़ रहा है,” उन्होंने कहा . एक अन्य महिला ने बताया, “मैं लकड़ी पर खाना नहीं बना सकती, मैं किराए के कमरे में रहती हूं। मेरा मकान मालिक (जमींदार) मुझे बाहर निकाल देगा” .

Rising LPG prices India: रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर मजदूरों की भीड़

Rising LPG prices India का असर साफ तौर पर रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर देखा जा सकता है, जहां मजदूर अपने परिवारों के साथ गांव लौटने के लिए इकट्ठा हो रहे हैं .

‘शादी का बहाना नहीं, मजबूरी है’

पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर संजुगता नाम की एक महिला मजदूर ट्रेन का इंतजार कर रही थी। उसने बताया, “हम अपने भाई की शादी के लिए गांव जा रहे हैं।” बाद में अपनी आंखों के आंसू पोंछते हुए उसने सच्चाई बताई, “कोई शादी नहीं है। हम यहां रह ही नहीं सकते। जब मैं रोजाना सिर्फ ₹200 कमाती हूं तो ₹600 का गैस सिलेंडर कैसे खरीद सकती हूं?” .

‘पेट भरना मुश्किल’

29 वर्षीय संजय कुमार, जो दिल्ली में एक हलवाई की दुकान पर काम करता था, अपने सामान के साथ आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर खड़ा था। उसने बताया, “पिछले 15 दिनों से मैंने मुश्किल से कुछ खाया है। पहले मुझे गैस ₹100 प्रति किलो मिलती थी, अब यह ₹300 से अधिक हो गई है। मैं ₹10,000 कमाता हूं, ऐसे खर्चों के साथ मैं कितना बचा पाऊंगा?” .

Rising LPG prices India: उद्योगों और छोटे कारोबारों पर असर

Rising LPG prices India का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्योगों और छोटे कारोबारों को भी भारी नुकसान हुआ है .

आजमपुर मंडी में सन्नाटा

आजमपुर मंडी में फुटफॉल (ग्राहकों की संख्या) में भारी गिरावट आई है। मिठू लाल, एक फल विक्रेता, ने बताया कि उसने 10 किलो सेब खरीदे थे, लेकिन उस दिन उसके 3 किलो सेब भी नहीं बिके . गुडिया देवी, दो बच्चों की मां, ने बताया कि उसने सुबह 10 बजे से दुकान लगाई थी और अब तक सिर्फ ₹120 कमाए हैं . “मैंने सिर्फ ₹120 कमाए हैं और मैं सुबह 10 बजे से यहां बैठी हूं,” उसने कहा .

ढाबों और रेस्टोरेंट पर संकट

एक कैटरर हरिंदर सिंह ने बताया कि उनके पास अब कोई ऑर्डर नहीं आ रहा है क्योंकि हर कोई एलपीजी संकट से जूझ रहा है . “अगर लोग मेरी सेवाओं का खर्च नहीं उठा सकते, तो इससे पता चलता है कि हालात कितने बुरे हैं,” उन्होंने कहा . ओडिशा के संबलपुर में ‘रोटी बैंक’ (Roti Bank) जैसी सामाजिक संस्थाएं भी एलपीजी की कमी के कारण रोटी बनाना बंद करने को मजबूर हैं, जिससे 40-50 गरीब लोगों को केवल चावल और दाल ही मिल पा रही है .

फार्मा सेक्टर पर भी असर

हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के फार्मास्युटिकल (Pharmaceutical) हब भी इस संकट की चपेट में हैं। कच्चे माल (Active Pharmaceutical Ingredients – APIs) के दामों में 30% तक की वृद्धि हुई है, और प्रवासी मजदूरों के पलायन से उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है .

Rising LPG prices India: क्या कहते हैं आंकड़े?

Rising LPG prices India की गंभीरता को समझने के लिए कुछ आंकड़ों पर नजर डालना जरूरी है:

पैरामीटरस्थिति
कालाबाजारी में गैस की कीमत₹300 से ₹450 प्रति किलो 
एक सिलेंडर (30 किलो) की अनौपचारिक कीमत₹10,500 तक (अनुमानित) 
कमर्शियल सिलेंडर की आधिकारिक कीमत₹1,700 – ₹1,900 
घरेलू सिलेंडर (14.2 किलो) की आधिकारिक कीमतलगभग ₹900 
दैनिक मजदूरी₹500 – ₹800 
एक मजदूर की औसत मासिक आयलगभग ₹10,000 – ₹15,000 

Rising LPG prices India: प्रशासन की कार्रवाई और सरकार का दावा

Rising LPG prices India के बीच, केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने का दावा किया है।

सरकार का आश्वासन

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Delhi CM Rekha Gupta) ने कहा है कि एलपीजी आपूर्ति “स्थिर और पर्याप्त” है . केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने भी आश्वासन दिया है कि लॉकडाउन (Lockdown) की कोई योजना नहीं है और अफवाहों से बचने की अपील की है . उन्होंने कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है .

छापेमारी और जब्ती

प्रशासन ने कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए कई छापेमारी (Raid) अभियान चलाए हैं। बवाना क्षेत्र (Bawana area) में 75 सिलेंडर जब्त किए गए और एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया . दिल्ली सरकार ने होर्डिंग (Hoarding) के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का दावा किया है .

Rising LPG prices India: निष्कर्ष

Rising LPG prices India ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वैश्विक संकट का असर सबसे पहले और सबसे बुरा गरीब और प्रवासी मजदूरों पर पड़ता है। महंगी गैस और काम की कमी के डबल झटके ने उन्हें शहर छोड़ने को मजबूर कर दिया है . आजमपुर मंडी की सूनी दुकानें, रेलवे स्टेशनों पर मजदूरों की लंबी कतारें और लकड़ी के चूल्हे पर लौटते परिवार इस संकट की दर्दनाक तस्वीर पेश करते हैं . सरकार के आश्वासनों के बावजूद, जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है। अब सवाल यह है कि क्या सरकार और संबंधित एजेंसियां इस बढ़ते संकट को समय रहते संभाल पाएंगी या आने वाले दिनों में यह समस्या और गहराएगी।

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