Monday, March 23, 2026

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असम में झामुमो 19 सीटों पर अकेले लड़ेगा चुनाव, कांग्रेस से सीट शेयरिंग पर नहीं बनी बात

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JMM to Contest Alone on 19 Seats in Assam, Seat-Sharing Talks with Congress Fail

रांची – टीम अबुआ

असम विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक समीकरण अब साफ होते नजर आ रहे हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की है कि वह राज्य में 19 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगा। कांग्रेस के साथ सीट शेयरिंग को लेकर लंबे समय से चल रही बातचीत के विफल होने के बाद पार्टी ने यह निर्णय लिया है। झामुमो के इस कदम से असम की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है, जहां विपक्षी एकजुटता को झटका लग सकता है।

सीट शेयरिंग पर नहीं बनी सहमति

सूत्रों के अनुसार, झामुमो और कांग्रेस के बीच पिछले कई दिनों से सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत चल रही थी। झामुमो की ओर से सम्मानजनक सीट शेयरिंग की मांग की जा रही थी, लेकिन इस पर सहमति नहीं बन पाई।बताया जा रहा है कि झामुमो पहले 20 से 25 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में था, लेकिन अंततः 19 सीटों पर ही अपने उम्मीदवार उतारने का निर्णय लिया गया। एक सीट सहयोगी दलों के लिए छोड़ी गई है।पार्टी का कहना है कि वह अब अपनी राजनीतिक ताकत के आधार पर चुनावी मैदान में उतरेगी और किसी भी स्थिति में अपने विस्तार की रणनीति से पीछे नहीं हटेगी।

दिल्ली तक चली बातचीत, फिर भी नहीं निकला हल

सीट शेयरिंग को लेकर मामला इतना अहम था कि झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren खुद दिल्ली पहुंचे और कांग्रेस नेताओं से मुलाकात की। हालांकि, कई दौर की बैठकों और चर्चाओं के बावजूद कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। अंततः झामुमो ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह असम में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगा।

झामुमो की रणनीति: विस्तार और पहचान

झामुमो के महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि पार्टी असम में मजबूती से चुनाव लड़ेगी और सत्तारूढ़ दल को कड़ी टक्कर देगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि झामुमो केवल झारखंड तक सीमित पार्टी नहीं रहना चाहता, बल्कि अन्य राज्यों में भी अपनी राजनीतिक पहचान स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है। असम चुनाव में अकेले उतरने का निर्णय इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

असम की राजनीति पर असर

झामुमो के इस फैसले का सीधा असर असम की चुनावी राजनीति पर पड़ सकता है। जहां एक ओर विपक्षी दलों के बीच तालमेल की कोशिशें कमजोर पड़ सकती हैं, वहीं दूसरी ओर यह मुकाबला और दिलचस्प होने की संभावना भी बढ़ गई है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झामुमो भले ही सीमित सीटों पर चुनाव लड़ रहा हो, लेकिन उसका यह कदम भविष्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण संकेत देता है।

आगे क्या?

अब झामुमो जल्द ही अपने उम्मीदवारों की सूची जारी करेगा और चुनावी अभियान को तेज करेगा। पार्टी का फोकस स्थानीय मुद्दों, जनसमर्थन और संगठनात्मक मजबूती पर रहेगा।

असम में यह चुनाव केवल सीटों का नहीं, बल्कि राजनीतिक विस्तार और पहचान का भी होगा—जहां झामुमो अपनी नई जमीन तलाशने की कोशिश करेगा।असम में झामुमो का अकेले चुनाव लड़ने का फैसला केवल एक रणनीतिक कदम नहीं, बल्कि पार्टी के राष्ट्रीय विस्तार के संकेत भी देता है।आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह निर्णय चुनावी नतीजों में कितना असर डालता है और क्या झामुमो अपने इस दांव में सफल हो पाता है या नहीं।

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