Thursday, March 19, 2026

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JAC मूल्यांकन विवाद: जदयू नेता धर्मेंद्र तिवारी ने उठाए सवाल, छात्रों के हित में मांगा अतिरिक्त समय

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JAC Evaluation Row: JD(U) Leader Dharmendra Tiwari Demands Extra Time for Internal Marks Upload

रांची- टीम अबुआ

झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) द्वारा आयोजित आठवीं बोर्ड परीक्षा 2026 के आंतरिक मूल्यांकन अंक अपलोड करने की प्रक्रिया में सामने आई अव्यवस्था को लेकर अब राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आने लगी है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र तिवारी ने इस पूरे मामले पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे विद्यार्थियों, शिक्षकों और विद्यालय प्रधानों के साथ अन्याय करार दिया है।

धर्मेंद्र तिवारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि वर्तमान परिस्थिति में आंतरिक मूल्यांकन अंक अपलोड करने की समयसीमा को बढ़ाया जाना बेहद जरूरी है। उन्होंने झारखंड सरकार के शिक्षा विभाग और JAC से मांग की है कि इस प्रक्रिया के लिए कम से कम एक सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया जाए, ताकि किसी भी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो।

उन्होंने अपने बयान में कहा कि राज्य के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों पर पहले से ही अत्यधिक कार्यभार है। शिक्षण कार्यों के साथ-साथ उन्हें कई गैर-शैक्षणिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं। ऐसे में यह उम्मीद करना कि सभी कार्य तय समय सीमा में बिना किसी बाधा के पूरे हो जाएंगे, व्यावहारिक नहीं है।

तिवारी ने यह भी कहा कि कई बार तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से भी कार्यों में देरी हो जाती है, जिसे केवल विद्यालय स्तर की लापरवाही बताना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि JAC की वेबसाइट का समय से पहले बंद हो जाना विभागीय लापरवाही का स्पष्ट संकेत है। ऐसे में इसकी जिम्मेदारी शिक्षकों या विद्यालयों पर डालना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता।

उन्होंने कहा कि विभाग और JAC की खामियों का खामियाजा शिक्षकों और विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है, जो पूरी तरह गलत है। यदि किसी छात्र के आंतरिक मूल्यांकन अंक अपलोड नहीं हो पाते और उसका परिणाम प्रभावित होता है, तो यह उसके भविष्य के साथ गंभीर अन्याय होगा।

धर्मेंद्र तिवारी ने यह भी कहा कि विद्यार्थियों ने पूरे साल मेहनत और लगन के साथ अपनी पढ़ाई पूरी की है। ऐसे में तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से उनके परिणाम में कोई बाधा आना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण होगा। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस मामले को संवेदनशीलता और व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखा जाए।

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने के लिए निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई करना या दबाव बनाना उचित नहीं है। इसके बजाय, सरकार को अपनी प्रणाली में सुधार करना चाहिए और ऐसी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

अंत में, जदयू नेता ने दोहराया कि आंतरिक मूल्यांकन अंक अपलोड करने की समयसीमा को तत्काल प्रभाव से बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि सभी विद्यालयों को पर्याप्त समय मिल सके और कोई भी छात्र इस प्रक्रिया की खामियों के कारण नुकसान का शिकार न बने

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