नई दिल्ली: भारत में मोबाइल इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले करोड़ों यूज़र्स के लिए आने वाले समय में डेटा महंगा हो सकता है। दरअसल, केंद्र सरकार मोबाइल डेटा पर ₹1 प्रति GB का अतिरिक्त शुल्क (लेवी) लगाने के प्रस्ताव का अध्ययन कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में वित्त वर्ष 2025 (FY25) में करीब 229 बिलियन GB मोबाइल डेटा का उपयोग हुआ। अगर प्रति GB ₹1 का शुल्क लागू किया जाता है, तो सरकार को हर साल लगभग ₹22,900 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है।
सितंबर 2026 तक आ सकती है रिपोर्ट
बताया जा रहा है कि दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications – DoT) इस प्रस्ताव का अध्ययन कर रहा है और इसकी अंतिम रिपोर्ट सितंबर 2026 तक सरकार को सौंप सकता है।

डिजिटल एडिक्शन से भी जुड़ा प्रस्ताव
अधिकारियों के अनुसार, इस प्रस्ताव का एक कारण बढ़ती डिजिटल लत (Digital Addiction) भी है। खासकर बच्चों और किशोरों में लंबे समय तक मोबाइल और इंटरनेट इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई जा रही है। सरकार का मानना है कि अगर डेटा की कीमत थोड़ी बढ़ती है, तो अत्यधिक स्क्रीन टाइम को कम करने में मदद मिल सकती है, साथ ही सरकार को अतिरिक्त राजस्व भी मिलेगा।
एक्सपर्ट्स ने जताई चिंता
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर टेलीकॉम विशेषज्ञों ने चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि इससे करोड़ों भारतीयों के लिए इंटरनेट महंगा हो सकता है और भारत की उस पहचान पर असर पड़ सकता है, जहां दुनिया में सबसे सस्ता मोबाइल डेटा उपलब्ध माना जाता है।

पहले से ही लगता है 18% GST
गौरतलब है कि मोबाइल यूज़र्स पहले से ही रिचार्ज पर 18% GST दे रहे हैं। ऐसे में अगर यह नया शुल्क लागू होता है, तो यह मौजूदा टैक्स के ऊपर अतिरिक्त बोझ बन सकता है।
अभी कोई अंतिम फैसला नहीं
फिलहाल सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। यह अभी अध्ययन के चरण में है और रिपोर्ट आने के बाद ही इस पर आगे निर्णय लिया जाएगा।


