नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत (CJI Surya Kant) की सख्त आपत्ति के बाद NCERT की कक्षा 8 की सोशल साइंस की किताब, जिसमें ‘ज्यूडीशियल करप्शन’ (न्यायपालिका में भ्रष्टाचार) नामक अध्याय शामिल था, की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है . NCERT के सूत्रों ने न्यूज एजेंसी ANI से इसकी पुष्टि की है। वहीं, PTI की रिपोर्ट के अनुसार, किताब से विवादित हिस्से को हटाया जा सकता है .
इस NCERT Book Ban CJI Statement ने शिक्षा जगत से लेकर कानूनी हलकों तक हड़कंप मचा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान (suo motu cognizance) लेते हुए इसे न्यायपालिका की गरिमा से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा करार दिया . आइए जानते हैं इस NCERT Book Ban CJI Statement से जुड़ी हर अहम बात और पूरे विवाद की तह तक।
NCERT Book Ban CJI Statement: क्या है पूरा मामला?

NCERT Book Ban CJI Statement की शुरुआत 23 फरवरी 2026 को हुई, जब NCERT ने कक्षा 8 के विद्यार्थियों के लिए सोशल साइंस की नई टेक्स्टबुक जारी की थी। ये किताब एकेडमिक सेशन 2026-27 से स्कूलों में पढ़ाई जानी थी .
किताब में क्या था?
किताब का नाम ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2’ है। इसमें ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी इन अवर सोसायटी’ चैप्टर के अंदर ‘करप्शन इन द ज्यूडिशियरी’ का टॉपिक जोड़ा गया था . इस सेक्शन में न्यायपालिका के सामने मौजूद चुनौतियों के रूप में निम्नलिखित बातें बताई गई थीं:
- भ्रष्टाचार: “लोग ज्यूडिशियरी के अलग-अलग लेवल पर करप्शन का सामना करते हैं। गरीबों और जरूरतमंदों की न्याय तक पहुंच की समस्या और बिगड़ सकती है” .
- केसों का बैकलॉग: सुप्रीम कोर्ट में 81 हजार, हाईकोर्ट में 62 लाख 40 हजार और डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में 4 करोड़ 70 लाख लंबित मामलों का जिक्र .
- जजों की कमी: “भारी संख्या में लंबित मामले कई कारणों से हैं, जैसे पर्याप्त संख्या में जजों की कमी, जटिल कानूनी प्रक्रियाएं और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर” .
- आंतरिक तंत्र: किताब में जजों के लिए आचार संहिता, CPGRAMS के जरिए शिकायत प्रणाली (2017-21 के बीच 1,600 से अधिक शिकायतें) और इंपीचमेंट की प्रक्रिया का भी जिक्र था .
NCERT Book Ban CJI Statement: सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
NCERT Book Ban CJI Statement का मामला 24 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में उठा, जब वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी ने CJI सूर्यकांत, जस्टिस विपुल एम पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष इस मुद्दे को उठाया .
बार का रुख
- कपिल सिब्बल ने कहा: “हम बतौर बार बेहद परेशान हैं। कक्षा 8 के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा है। यह निंदनीय है” .
- अभिषेक सिंघवी ने कहा: “चयनात्मकता देखिए। मान लिया गया है कि राजनीति, नौकरशाही और अन्य संस्थानों में कोई भ्रष्टाचार नहीं है। सिर्फ न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है” .
CJI की सख्त टिप्पणी
CJI सूर्यकांत ने इस NCERT Book Ban CJI Statement पर बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा:
- “दुनिया में किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी” .
- “यह एक सोची-समझी और गहरी साजिश लगती है। मुझे पता है इससे कैसे निपटना है। मैं यह केस खुद हैंडल करूंगा” .
- “चाहे कितना भी बड़ा मामला हो, हम कार्रवाई करेंगे। हम किसी को भी न्यायपालिका की अखंडता पर सवाल उठाने की अनुमति नहीं देंगे” .
कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
CJI ने बताया कि उन्होंने प्रशासनिक पक्ष पर पहले ही आदेश पारित कर दिया है और वे इस मामले का स्वतः संज्ञान (suo motu cognizance) ले रहे हैं . उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के जज भी इस मामले से परेशान हैं और उन्हें कई कॉल और संदेश मिल रहे हैं .
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि “संवैधानिक नैतिकता, जैसा कि बुनियादी संरचना में परिकल्पित है, किताब में गायब है” .
NCERT Book Ban CJI Statement: सरकार और NCERT की प्रतिक्रिया
NCERT Book Ban CJI Statement के बाद हरकत में आई NCERT ने तुरंत कदम उठाया।
किताब की बिक्री पर रोक
NCERT के सूत्रों ने पुष्टि की कि विवादित किताब की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। मंगलवार से ही इसे बिक्री से हटा लिया गया और वेबसाइट से भी हटा दिया गया .
आंतरिक जांच
NCERT ने इस अध्याय का सुझाव देने वाले विशेषज्ञों और इसे मंजूरी देने वाले अधिकारियों की एक आंतरिक बैठक बुलाई है .
सरकारी सूत्रों का बयान
सरकारी सूत्रों ने कहा कि भले ही NCERT एक स्वायत्त संस्था है, लेकिन अध्याय जोड़ने से पहले अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि अगर भ्रष्टाचार का मुद्दा शामिल करना था, तो उसमें शासन के तीनों अंगों – कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका – को भी जोड़ा जाना चाहिए था .
NCERT Book Ban CJI Statement: क्यों है यह विवाद महत्वपूर्ण?
NCERT Book Ban CJI Statement सिर्फ एक किताब के विवाद से कहीं बढ़कर है। यह कई गहरे मुद्दों को उजागर करता है।
न्यायपालिका की स्वायत्तता और छवि
यह पहली बार नहीं है जब न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच तनाव देखा गया है। पहले NJAC मामले में भी यह टकराव सामने आया था . CJI ने साफ कर दिया कि वे न्यायपालिका की छवि को किसी भी कीमत पर धूमिल नहीं होने देंगे।
शैक्षणिक स्वतंत्रता बनाम संस्थागत गरिमा
यह मामला एक बुनियादी संवैधानिक बहस को भी जन्म देता है – आखिर संस्थागत आलोचना का अधिकार और संस्थानों की गरिमा के बीच संतुलन क्या होना चाहिए? . क्या स्कूली बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए? और अगर हां, तो क्या अन्य संस्थानों में भ्रष्टाचार पर भी उतनी ही सख्ती से चर्चा होनी चाहिए?
चयनात्मक दृष्टिकोण का सवाल
अभिषेक सिंघवी ने जो सवाल उठाया वह सबसे अहम है – चयनात्मकता। जब किताब में राजनीति, नौकरशाही और अन्य संस्थानों में भ्रष्टाचार का कोई जिक्र नहीं है, तो सिर्फ न्यायपालिका को अकेले क्यों चुना गया? .
NCERT Book Ban CJI Statement: आगे क्या?
NCERT Book Ban CJI Statement के बाद अब आगे की कार्यवाही कैसे होगी?
- सुप्रीम कोर्ट की निगरानी: CJI ने साफ किया है कि वे इस केस को खुद देखेंगे .
- NCERT की समीक्षा: NCERT ने किताब को वापस ले लिया है और आंतरिक समीक्षा शुरू कर दी है .
- संभावित बदलाव: सूत्रों के मुताबिक, किताब से विवादित हिस्से को हटाया जा सकता है या उसमें संशोधन किया जा सकता है .
- नई किताब का इंतजार: फिलहाल कक्षा 8 के विद्यार्थियों को नई किताब का इंतजार करना होगा, क्योंकि यह किताब बिक्री से हटा ली गई है।
NCERT Book Ban CJI Statement: विशेषज्ञों की राय
NCERT Book Ban CJI Statement पर विशेषज्ञों की अलग-अलग राय है।
- कानूनी विशेषज्ञ: कुछ कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि CJI की प्रतिक्रिया स्वाभाविक थी क्योंकि यह न्यायपालिका की छवि से जुड़ा मामला था। उनका कहना है कि किसी भी संस्थान को अपनी छवि की सुरक्षा का अधिकार है।
- शिक्षाविद्: वहीं, कुछ शिक्षाविदों का कहना है कि अगर किताब में तथ्यों के साथ संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाता, तो शायद यह विवाद न होता। उनका मानना है कि बच्चों को संस्थानों की कमजोरियों के बारे में भी पढ़ाया जाना चाहिए, लेकिन उसके लिए संतुलित नजरिया जरूरी है।
NCERT Book Ban CJI Statement: निष्कर्ष
NCERT Book Ban CJI Statement ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि न्यायपालिका अपनी गरिमा और स्वतंत्रता के प्रति कितनी सजग है। CJI सूर्यकांत के सख्त रुख और “मैं इस केस को खुद देखूंगा” वाले बयान ने साफ कर दिया है कि न्यायपालिका किसी भी कीमत पर अपनी छवि को धूमिल नहीं होने देगी .
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस NCERT Book Ban CJI Statement के बाद NCERT अपनी आंतरिक समीक्षा में क्या निष्कर्ष निकालता है और क्या सरकार शिक्षा नीति में कोई बदलाव करती है। फिलहाल, विवादित किताब की बिक्री पर रोक है और मामला सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है। यह घटना शिक्षा और न्यायपालिका के बीच संवेदनशील संतुलन को रेखांकित करती है।
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